अंतिम संस्कार में नहीं आईं, अस्थि विसर्जन में भी नहीं पहुंचीं बेटियां; ‘मजबूरी’ बताकर घर पर करेंगी तेरहवीं
सोनीपत/हरिद्वार। रिश्तों की दूरी और आखिरी वक्त की जिम्मेदारी से जुड़ी एक भावुक कहानी सामने आई है। सोनीपत के वृद्धाश्रम में रहने वाले कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं। अब अस्थि विसर्जन के लिए भी उन्हें हरिद्वार पहुंचना संभव नहीं हुआ। ऐसे में करीब 10 साल से भाई से संपर्क में नहीं रहे बड़े भाई महेंद्र गुप्ता आगे आए। सोशल मीडिया के जरिए छोटे भाई की मौत की जानकारी मिलने के बाद वे हरिद्वार पहुंचे और विधि-विधान से उनकी अस्थियों का विसर्जन किया।
सोशल मीडिया से मिली भाई की मौत की खबर
महेंद्र गुप्ता के मुताबिक, उनका अपने छोटे भाई शिवचरण और उनके परिवार से लगभग एक दशक से संपर्क नहीं था। उन्हें भाई की मौत की जानकारी परिवार की ओर से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले नेपाल में आए भूकंप के दौरान उन्हें लगा था कि शायद उनके भाई की मौत हो गई है। इसी वजह से उन्होंने शिवचरण को मृत मान लिया था। बाद में सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि शिवचरण जीवित थे और वृद्धाश्रम में रह रहे थे। अब उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद महेंद्र ने छोटे भाई की अंतिम रस्में निभाने का फैसला किया।
बेटियां अस्थि विसर्जन के लिए भी नहीं पहुंचीं
आज महेंद्र गुप्ता हरिद्वार पहुंचे। उनके साथ कुछ समाजसेवी भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने छोटे भाई की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर अंतिम रस्म पूरी की। इस दौरान एक बार फिर यह सवाल उठा कि शिवचरण की तीनों बेटियां अंतिम रस्मों के लिए क्यों नहीं पहुंचीं ? वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बड़ी बेटी से संपर्क किया तो उन्होंने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वह अपने पिता की अंतिम रस्में सम्मानपूर्वक पूरी होते देखना चाहती हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण हरिद्वार नहीं आ सकीं।
‘हम शर्मिंदा हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी’
वृद्धाश्रम प्रबंधन के मुताबिक, बड़ी बेटी ने बातचीत के दौरान कहा कि “हम शर्मिंदा तो बहुत हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी।” उन्होंने कहा कि यदि उनकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार पहुंचतीं। उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधन से आग्रह किया कि उनके पिता की अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन कराया जाए और उनके छोटे चाचा महेंद्र गुप्ता को परिवार के सदस्य की तरह अंतिम रस्में निभाने दी जाएं।
बेटियों ने कहा- पिता से बहुत प्यार करती थीं
बड़ी बेटी ने अपने पिता के प्रति भावनात्मक लगाव का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वह और उनकी बहनें अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं, लेकिन उनके पिता उनके साथ रहने के लिए तैयार नहीं थे। बेटियों ने अपनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि वे अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन में मौजूद नहीं हो सकीं, लेकिन पिता की अंतिम रस्में सम्मान के साथ पूरी हों, यह उनकी इच्छा है। उन्होंने यह भी बताया कि पिता की तेरहवीं की रस्म वे अपने घर पर करेंगी।
सात भाई-बहनों में बड़े भाई ने निभाया फर्ज
शिवचरण गुप्ता सात भाई-बहनों में से एक थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने छोटे भाई के लिए अंतिम जिम्मेदारी निभाई। खास बात यह रही कि महेंद्र ने बेटियों की गैरमौजूदगी पर कोई कठोर टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि उनकी भी कोई मजबूरी रही होगी। करीब 10 साल तक संपर्क से दूर रहे भाई ने जब सोशल मीडिया से मौत की खबर सुनी, तो हरिद्वार पहुंचकर अस्थि विसर्जन करना अपना फर्ज समझा।
वृद्धाश्रम ने भी निभाई जिम्मेदारी
शिवचरण गुप्ता की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन ने संभाली थी। परिवार के सदस्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संस्था और समाजसेवियों ने अंतिम प्रक्रिया पूरी कराई। अब अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी भी संस्था से जुड़े लोगों और उनके बड़े भाई ने निभाई। एक तरफ बेटियां परिस्थितियों के चलते पिता की अंतिम रस्मों में शामिल नहीं हो सकीं, तो दूसरी तरफ वर्षों से संपर्क से दूर बड़े भाई ने सोशल मीडिया से खबर मिलने के बाद आगे बढ़कर अपना फर्ज निभाया। इस घटना ने रिश्तों, मजबूरियों और परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर कई भावुक सवाल जरूर छोड़ दिए हैं।
