राघव चड्ढा से पहले छीना पद, अब सुरक्षा भी वापस, पंजाब की राजनीति में मचा घमासान
चंडीगढ़। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। पहले राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली है। भगवंत मान के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले को पार्टी के भीतर बढ़ती खाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, राघव चड्ढा को पहले पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद होने के कारण सुरक्षा दी गई थी, जिसे अब वापस ले लिया गया है। इससे पहले 2 अप्रैल को पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया था। साथ ही राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया गया कि चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए, जिससे उनकी भूमिका सीमित होती नजर आई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज और आतिशी समेत कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनका विरोध किया और उन पर पार्टी लाइन से हटने के आरोप लगाए। इससे यह साफ हो गया कि विवाद अब अंदरूनी नहीं, बल्कि सार्वजनिक हो चुका है।
इसी बीच सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को Z+ सुरक्षा देने पर विचार कर रही है, जिसे लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों ने इस दावे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही है। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपनेता पद से हटाना और सुरक्षा वापस लेना जैसे फैसले किसी बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करते हैं। पंजाब की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़े सियासी बदलाव की भूमिका तैयार कर सकता है, जहां पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, टकराव के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
