आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर हाईकोर्ट सख़्त, बिजली कंपनी से माँगा हलफ़नामा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) को आरक्षण के नियमों की मनमानी पर कड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कंपनी से सीधा जवाब माँगा है कि अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए नौकरी और प्रमोशन में कितने प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है और यह प्रतिशत किस आधार पर तय हुआ। यह कानूनी कार्रवाई तब हुई जब कुछ जूनियर इंजीनियरों ने प्रमोशन में आरक्षण रोस्टर को अचानक बदलने के खिलाफ याचिका दायर की।
विज्ञापन दिया 16 पदों का, प्रमोशन मिला सिर्फ 9 को
कनिष्ठ अभियंता प्रशांत विल्सन पन्ना और शीतल समीर टोप्पो समेत अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है कि 22 अगस्त 2024 को सहायक अभियंता (प्रशिक्षु) के लिए प्रमोशन का जो विज्ञापन निकला था, उसमें भारी गड़बड़ी की गई। याचिकाकर्ताओं के वकील नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि विज्ञापन में ST वर्ग के लिए 16 पद दिखाए गए थे। विभागीय परीक्षा पास करने और 30 जुलाई 2025 को इंटरव्यू देने के बाद, कंपनी ने बिना कोई शुद्धिपत्र निकाले 29 नवंबर 2012 की सरकारी अधिसूचना का हवाला देकर रोस्टर बदल दिया।
हाईकोर्ट ने पूछा—आंकड़े नहीं तो बदलाव कैसे?
रोस्टर बदलने के बाद, ST वर्ग के पद 16 से घटाकर सिर्फ 9 कर दिए गए, जबकि अनारक्षित (UR) पद 17 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। इसके अलावा, SC और OBC वर्ग के लिए भी पद जोड़े गए, जो पहले शून्य थे।
कोर्ट ने इस मनमाने बदलाव को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कंपनी से तीखे सवाल पूछे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब न तो कोई ठोस सरकारी आँकड़ा है और न ही राज्य सरकार का कोई साफ आदेश, तो आरक्षण रोस्टर में यह बदलाव आखिर किस नियम से किया गया? याचिकाकर्ताओं का साफ कहना है कि यह बदलाव आरक्षण नियमों का सीधा उल्लंघन है, जिसका खामियाजा ST वर्ग के उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है।
अदालत ने CSPDCL को सख्त निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होनी है, तब तक कंपनी विस्तृत हलफ़नामा दाखिल कर हर बिंदु पर संतोषजनक जवाब पेश करे।
