हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्मचारी की मौत के बाद विभागीय जांच और बर्खास्तगी आदेश अवैध, पत्नी की अनुकंपा नियुक्ति पर 90 दिन में फैसला

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कर्मचारी की मौत के बाद विभागीय जांच और बर्खास्तगी आदेश अवैध, पत्नी की अनुकंपा नियुक्ति पर 90 दिन में फैसला

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ चल रही विभागीय जांच को सामान्य परिस्थितियों में जारी नहीं रखा जा सकता । कर्मचारी की मृत्यु के बाद विभागीय जांच के आधार पर जारी किया गया बर्खास्तगी आदेश भी कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा । कोर्ट ने मृत कर्मचारी की पत्नी के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर संबंधित प्राधिकारी को नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है ।

मामला रायपुर के शांति नगर निवासी अर्चना श्रीवास्तव से जुड़ा है । उनके पति वेदांत श्रीवास्तव इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में लैब अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे । वर्ष 2019 में उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए गए थे । आरोप था कि नियुक्ति के दौरान रोस्टर नियमों का पालन नहीं किया गया था और अनुभव प्रमाण पत्र विज्ञापन में निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं था ।

इस मामले में संस्थान की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था । उन्होंने नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी । कोर्ट के निर्देश के बाद वे विभागीय जांच में शामिल हो रहे थे । इसी बीच जांच पूरी होने से पहले 19 फरवरी 2025 को उनका निधन हो गया ।

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मौत के बाद जारी कर दिया बर्खास्तगी आदेश

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कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी संस्थान ने 15 मई 2025 को उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया । इसके बाद उनकी पत्नी अर्चना श्रीवास्तव ने पति की मृत्यु के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया । संस्थान ने 5 अगस्त 2025 को आवेदन खारिज करते हुए कहा कि उनके पति को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है । संस्थान के इस निर्णय को चुनौती देते हुए अर्चना श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की । मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच में हुई ।

हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश किया रद्द

हाईकोर्ट ने शीर्ष अदालत के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के साथ सामान्य परिस्थितियों में उसके खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही समाप्त हो जाती है । कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय गबन या धन के दुरुपयोग जैसे मामलों को छोड़कर मृत कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता ।

कोर्ट ने पाया कि वेदांत श्रीवास्तव के खिलाफ धन के दुरुपयोग या गबन का कोई आरोप नहीं था । ऐसे में उनकी मृत्यु के बाद विभाग द्वारा जारी किया गया बर्खास्तगी आदेश कानूनन टिकाऊ नहीं है । हाईकोर्ट ने 15 मई 2025 के बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया, साथ ही कहा कि जब बर्खास्तगी आदेश ही समाप्त हो गया है, तो उसी के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन खारिज करने वाला 5 अगस्त 2025 का आदेश भी स्वतः अमान्य हो जाता है ।

90 दिनों में अनुकंपा नियुक्ति पर फैसला

हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि वह अर्चना श्रीवास्तव के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर लागू नीति और नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर नए सिरे से विचार कर उचित निर्णय ले । कोर्ट ने मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के भी निर्देश दिए हैं । इस फैसले को कर्मचारी की मृत्यु के बाद विभागीय कार्रवाई और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।

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