6 महीने की तैयारी पर फिरा पानी! Bombay HC Clerk Typing Test में सिस्टम फेल, अभ्यर्थी सड़क पर उतरे
मुंबई। बांबे हाई कोर्ट में लिपिक पदों की भर्ती के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग टेस्ट को लेकर महाराष्ट्र के कई परीक्षा केंद्रों पर बवाल खड़ा हो गया है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों और सिस्टम फेल होने का आरोप लगाया है। छत्रपति संभाजीनगर और कल्याण-डोंबिवली समेत कुछ केंद्रों पर परीक्षा प्रभावित होने के बाद नाराज उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों के बाहर जमा हो गए और दोबारा परीक्षा कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं ने उनका पूरा प्रयास प्रभावित कर दिया।
टेस्ट शुरू हुआ और सिस्टम ने देना शुरू किया जवाब
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों के मुताबिक, ऑनलाइन टेस्ट शुरू होने के कुछ ही देर बाद कई कंप्यूटरों में दिक्कतें आने लगीं। कहीं कीबोर्ड की बटन काम नहीं कर रही थी, तो कहीं माउस ने जवाब दे दिया। कुछ अभ्यर्थियों ने स्क्रीन के रंग बदलने की भी शिकायत की। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने के लगभग 10 मिनट के भीतर सिस्टम ने अपने आप लॉगआउट कर दिया। इसके बाद वे दोबारा टेस्ट में शामिल नहीं हो सके। अभ्यर्थियों का दावा है कि तकनीकी खराबी उनकी तरफ से नहीं थी, फिर भी उन्हें परीक्षा में असफल होने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
दूर-दराज से पहुंचे थे अभ्यर्थी
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने बताया कि कई अभ्यर्थी बीड, लातूर, अमरावती और अंबाजोगाई जैसे दूर-दराज के इलाकों से परीक्षा देने पहुंचे थे। उनका कहना है कि इस भर्ती के लिए उन्होंने कई महीनों तक तैयारी की थी। ऐसे में परीक्षा केंद्र की तकनीकी व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण परीक्षा प्रभावित होना उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा। छात्रों का कहना है कि अगर सिस्टम में खराबी थी तो उन्हें दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए।
परीक्षा केंद्र के बाहर प्रदर्शन, उठी री-एग्जाम की मांग
छत्रपति संभाजीनगर के सुराणा नगर स्थित परीक्षा केंद्र पर विवाद बढ़ने के बाद अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करते हुए प्रभावित उम्मीदवारों के लिए दोबारा टेस्ट कराने की मांग रखी। इस दौरान अभिजीत दीपके भी प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे। उन्होंने परीक्षा संचालन में तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठाए और प्रभावित छात्रों के लिए लिखित रूप से पुनर्परीक्षा का आश्वासन देने की मांग की। उनका कहना था कि यदि परीक्षा के दौरान सिस्टम ही उम्मीदवारों का साथ छोड़ दे तो उसकी जिम्मेदारी अभ्यर्थियों पर नहीं डाली जा सकती।
हाई कोर्ट प्रशासन ने भी माना- कुछ केंद्रों पर आई तकनीकी शिकायतें
विवाद बढ़ने के बाद बांबे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (कार्मिक) की ओर से स्थिति पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई। प्रशासन के मुताबिक, लिपिक पद के लिए आयोजित टाइपिंग टेस्ट अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर सामान्य रूप से संपन्न हुआ, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर और कल्याण के कुछ केंद्रों से तकनीकी समस्याओं की शिकायतें मिली हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने कहा है कि इन तकनीकी विसंगतियों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों को आगे की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक सूचना दी जाएगी।
अब निगाह जांच के नतीजे पर
फिलहाल अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग पुनर्परीक्षा को लेकर है। वहीं हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से तकनीकी समस्याओं की जांच का भरोसा दिया गया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच में तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि कितने केंद्रों पर होती है और प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए क्या निर्णय लिया जाता है। महीनों की तैयारी, परीक्षा केंद्र तक लंबा सफर और फिर कुछ ही मिनटों में सिस्टम से बाहर बांबे हाई कोर्ट की क्लर्क टाइपिंग परीक्षा को लेकर उठा विवाद अब सिर्फ तकनीकी खराबी का मामला नहीं रहा, बल्कि अभ्यर्थियों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है।
