Baby Care Tips: 1 साल से छोटे बच्चे को शहद देना क्यों है खतरनाक? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर नवजात को लेकर अपने अनुभव के आधार पर कई तरह की सलाह देते हैं। कुछ जगहों पर जन्म के बाद बच्चे को शहद चटाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह इससे बिल्कुल अलग है। 12 महीने से कम उम्र के बच्चे को शहद नहीं देना चाहिए, चाहे वह सीधे दिया जाए या दूध, पानी, बेबी फूड या किसी अन्य चीज में मिलाकर। CDC के अनुसार, शहद में ऐसे बैक्टीरिया के स्पोर मौजूद हो सकते हैं जो शिशुओं में इन्फेंट बोटुलिज्म का कारण बन सकते हैं।
शहद से छोटे बच्चे को क्या खतरा हो सकता है?
शहद प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है, लेकिन एक साल से कम उम्र के शिशु के लिए इसे सुरक्षित नहीं माना जाता। इसमें Clostridium botulinum के स्पोर हो सकते हैं। शिशु की आंतों में ये स्पोर बढ़कर टॉक्सिन बना सकते हैं और इससे इन्फेंट बोटुलिज्म जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। इस बीमारी के संभावित लक्षणों में कब्ज, दूध पीने में परेशानी, कमजोर तरीके से चूसना, कमजोर रोना, शरीर में ढीलापन और मांसपेशियों में कमजोरी शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
सिर्फ चटाने से भी बचें
कई परिवारों में बच्चे को शहद की छोटी-सी मात्रा चटाने को नुकसानरहित माना जाता है। लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चे के मामले में थोड़ी मात्रा को भी सुरक्षित मानकर देना सही नहीं है। CDC स्पष्ट रूप से 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को शहद न देने की सलाह देता है। शहद को दूध, पानी, फॉर्मूला, बेबी फूड या पेसिफायर पर लगाकर भी नहीं देना चाहिए।
6 महीने तक बच्चे को पानी देने की जरूरत क्यों नहीं?
शहद के अलावा नवजात के शुरुआती महीनों में पानी देने को लेकर भी कई गलतफहमियां हैं। WHO और UNICEF की सिफारिश के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में बच्चे को पहले 6 महीने केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए और इसमें पानी भी शामिल है। मां के दूध से बच्चे को इस अवधि में आवश्यक पोषण और तरल मिल सकता है। छह महीने की उम्र के आसपास बच्चे को मां के दूध के साथ सुरक्षित और पौष्टिक complementary foods देना शुरू किया जाता है। इसके बाद भी स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।
घर के नुस्खों से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी
नवजात का खानपान बेहद संवेदनशील विषय है। इसलिए परिवार में प्रचलित किसी परंपरा या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर जन्म के तुरंत बाद बच्चे को शहद, पानी या कोई अन्य खाद्य पदार्थ अपनी तरफ से न दें।
