छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, 16 अस्पतालों को किया बाहर; 5 पर तीन साल के प्रतिबंध की तैयारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अनियमितता बरतने वाले अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। योजना के नियमों का उल्लंघन करने और मरीजों के इलाज में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद प्रदेश के 16 अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर कर दिया गया है। अब इन अस्पतालों में निर्धारित अवधि तक आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का मुफ्त इलाज नहीं हो सकेगा।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने पांच अन्य अस्पतालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इन अस्पतालों को तीन साल तक आयुष्मान भारत योजना से बाहर रखने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्तावित कार्रवाई की जद में रायपुर और भिलाई के कुछ बड़े अस्पताल भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन अस्पतालों के नाम और अंतिम आदेश को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई जांच के दौरान संबंधित अस्पतालों में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके अलावा मरीजों और अन्य माध्यमों से भी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों और जांच में मिले तथ्यों के आधार पर विभाग ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र मरीजों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाती है।
ऐसे में यदि कोई अस्पताल योजना के नियमों का उल्लंघन करता है या मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में गड़बड़ी करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
16 अस्पतालों में नहीं मिलेगा आयुष्मान योजना का लाभ
स्वास्थ्य विभाग की ताजा कार्रवाई के बाद प्रदेश के 16 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के दायरे से बाहर हो गए हैं। इन अस्पतालों में निर्धारित प्रतिबंध अवधि के दौरान योजना के तहत मरीजों का उपचार नहीं किया जा सकेगा।
इस फैसले का असर उन मरीजों पर भी पड़ सकता है, जो इलाज के लिए इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पहुंचते थे। ऐसे मरीजों को उपचार कराने से पहले अस्पताल की वर्तमान सूचीबद्ध स्थिति की जानकारी लेना जरूरी होगा। पात्र हितग्राही योजना से जुड़े अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
रायपुर और भिलाई के अस्पताल भी जांच के दायरे में
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने पांच अन्य अस्पतालों को तीन साल तक योजना से बाहर रखने का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें रायपुर और भिलाई के बड़े अस्पतालों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो संबंधित अस्पतालों को लंबे समय तक आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे अस्पतालों को आर्थिक नुकसान होने के साथ ही योजना के तहत उनकी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
मरीजों के हितों की सुरक्षा पर विभाग का जोर
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को आयुष्मान भारत योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि योजना का लाभ वास्तविक पात्र मरीजों तक पहुंचे और अस्पतालों की ओर से किसी भी तरह की अनियमितता न की जाए।
आयुष्मान भारत योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से अस्पतालों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि योजना के नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल 16 अस्पतालों को योजना से बाहर करने की कार्रवाई की गई है, जबकि पांच अन्य अस्पतालों के खिलाफ तीन साल के प्रतिबंध का प्रस्ताव तैयार है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और संबंधित अस्पतालों की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
