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मार्कफेड में 18 करोड़ का तिरपाल घोटाला 18500 का टेंडर पर गुपचुप खरीद लिए 33 हजार नग
रायपुर। छत्तीसगढ़ मार्कफेड में तिरपाल खरीदी के नाम पर बड़ा खेल हो गया है। धान को बारिश से बचाने के लिए 18500 तिरपाल खरीदने का टेंडर निकला था। लेकिन अफसरों ने अपनी गजब की दरियादिली दिखाते हुए गुपचुप तरीके से 33 हजार तिरपाल खरीद डाले। मतलब तय मात्रा से 14517 नग ज्यादा खरीदे गए। यह पूरी खरीदी जीएसटी समेत 12685 रुपए प्रति नग के हिसाब से हुई। इस सौदे में सीधे तौर पर 18 करोड़ रुपए से ज्यादा का हेरफेर हुआ है।
अधिकारियों की इस मेहरबानी का नतीजा यह है कि दो करोड़ रुपए से ज्यादा के 1630 तिरपाल बिना इस्तेमाल के ही पड़े हैं। रायपुर बिलासपुर महासमुंद रायगढ़ और गौरेला पेंड्रा मरवाही जैसे जिलों में ये महंगे तिरपाल धूल फांक रहे हैं। दूसरी तरफ जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। राजनांदगांव के घोटिया और दुर्ग के कई धान खरीदी केंद्रों में धान आधा ढंका और आधा खुला पड़ा है। कहीं फटे तिरपाल से धान को ढंका गया है। कई समितियों को तो मजबूरी में खुद के पैसे से तिरपाल खरीदने पड़ गए। मतलब जहां जरूरत है वहां तिरपाल नहीं हैं और जहां जरूरत नहीं है वहां करोड़ों का माल डंप पड़ा है।
इस घोटाले में टेंडर के नियम भी बड़े शानदार तरीके से सेट किए गए हैं। जिन कंपनियों पर भारतीय खाद्य निगम पहले ही कार्रवाई कर चुका है उन्हें ही बार बार काम दिया जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया में गिने चुने नाम ही आते हैं। ये फर्में आपस में मिलकर कार्टल बनाती हैं। टेंडर खुलने पर जो कंपनी पहले दूसरे या तीसरे नंबर पर आती है सभी को आपस में काम बांट दिया जाता है। नई टेंडर प्रक्रिया में टंडन बैग पॉली और क्लाइमेक्स को सप्लाई का काम मिला है। ताज्जुब की बात यह है कि यही कंपनियां हरियाणा और पश्चिम बंगाल में 9 हजार से 10 हजार रुपए के सस्ते दाम पर तिरपाल बेचती हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में 12 हजार से ज्यादा का मोटा रेट वसूलती हैं।
इस पूरे मामले में मार्कफेड के एमडी जितेंद्र शुक्ला का रवैया भी बड़ा दिलचस्प है। उनका कहना है कि उनकी इसमें कोई रुचि नहीं है और जो फर्में टेंडर में आएंगी उन्हें ही तो काम देंगे। दूसरी ओर मार्कफेड के चेयरमैन शशिकांत द्विवेदी ने इस पूरी गड़बड़ी और नई खरीदी में मिली शिकायतों को संज्ञान में लिया है। उन्होंने विभाग प्रमुख को नोटशीट लिखकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब देखना है कि 18 करोड़ के इस खेल में जांच कहां तक पहुंचती
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
