रायपुर में अब GPS से ट्रैक होंगे 260 कचरा वाहन, घर बैठे मिलेगी गाड़ी की लोकेशन और पहुंचने का समय
रायपुर। राजधानी रायपुर में सफाई व्यवस्था को हाईटेक और पारदर्शी बनाने के लिए नगर निगम बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब शहर के लोगों को घर के बाहर कचरा गाड़ी नहीं पहुंचने पर निगम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगर निगम शहर में संचालित सभी 260 कचरा वाहनों को जीपीएस आधारित डिजिटल निगरानी प्रणाली से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नागरिक अपने मोबाइल के माध्यम से कचरा गाड़ी की वास्तविक लोकेशन और उसके घर पहुंचने का संभावित समय जान सकेंगे।
नगर निगम की इस नई पहल का उद्देश्य कचरा संग्रहण व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ सफाई कर्मचारियों और वाहनों की जवाबदेही तय करना है। फिलहाल 50 से 60 कचरा वाहनों के रूट को डिजिटल किया जा चुका है। निगम ने अगले 15 से 20 दिनों में बाकी वाहनों को भी इस सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंदौर में सफाई व्यवस्था की निगरानी करने वाली विशेषज्ञ एजेंसी की सेवाएं ली जा रही हैं।
तय रूट से भटके तो सिस्टम देगा रेड फ्लैग
डिजिटल निगरानी प्रणाली के तहत प्रत्येक कचरा वाहन का निर्धारित रूट और समय ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। वाहन चालक तय रास्ते से भटकता है या निर्धारित समय से 30 मिनट से ज्यादा देरी करता है तो सिस्टम तत्काल रेड फ्लैग जारी करेगा। इसके अलावा यदि कोई वाहन बिना उचित कारण किसी स्थान पर 15 से 20 मिनट तक खड़ा रहता है, तो इसकी जानकारी भी कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।
कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर वाहन की स्थिति की जांच कर सकेंगे। लापरवाही सामने आने पर संबंधित वाहन चालक या जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। इससे कचरा संग्रहण में होने वाली देरी और मनमानी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
पांच मिनट में पता चलेगी शिकायत की हकीकत
अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि उनके इलाके में कचरा गाड़ी नहीं पहुंची या कई दिनों तक कचरा नहीं उठाया गया। ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए अब निगम डिजिटल रिकॉर्ड का सहारा लेगा। शिकायत मिलने पर संबंधित वाहन की लोकेशन, निर्धारित रूट और उसके पहुंचने के समय की जांच की जाएगी।
नगर निगम का दावा है कि नई व्यवस्था से शिकायतों की वास्तविकता का पता महज पांच मिनट में लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही सड़क और नाली की सफाई का काम भी डिजिटल रूप से दर्ज होगा। सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें अपलोड की जाएंगी। इससे यह प्रमाणित किया जा सकेगा कि संबंधित क्षेत्र में वास्तव में सफाई हुई है या नहीं।
कचरा फैलाने वालों पर लगेगा जुर्माना
नगर निगम अब केवल कचरा उठाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों पर भी निगरानी बढ़ाएगा। इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। सफाई कर्मचारी भी सड़क, नाली या सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों की तस्वीरें समय और लोकेशन के साथ डिजिटल सिस्टम में अपलोड कर सकेंगे।
इन तस्वीरों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान कर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जो नागरिक बार-बार कचरा वाहन में कचरा देने से मना करते हैं, उनकी जानकारी भी कर्मचारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
डंपिंग स्थलों को बनाया जाएगा ग्रीन कार्नर
शहर में खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर खत्म करने के लिए नगर निगम ने एक और योजना तैयार की है। ऐसे स्थानों को साफ कर छोटे उद्यानों और ग्रीन कार्नर के रूप में विकसित किया जाएगा। टूरी हटरी और गुरु तेग बहादुर उद्यान में बदलाव के बाद निगम ने सभी जोन को हर सप्ताह दो-दो स्थानों का कायाकल्प करने का लक्ष्य दिया है।
इन स्थानों पर पौधारोपण, पेवर ब्लॉक, लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए जब्त की गई पुरानी रेलिंग और लोहे के सामान का उपयोग बाउंड्री बनाने में किया जा रहा है। इससे शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के साथ अनुपयोगी स्थानों का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।
सीएसआर से होगा उद्यानों का रखरखाव
नगर निगम ने शहर के उद्यानों और रोड डिवाइडरों के रखरखाव के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत 14 नवंबर तक इच्छुक संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। औद्योगिक घरानों, अस्पतालों, मीडिया संस्थानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को उद्यान गोद देने की योजना बनाई गई है।
इसके तहत संस्थाएं उद्यानों का रखरखाव कर सकेंगी और वहां अपनी ब्रांडिंग भी कर पाएंगी। साथ ही सालभर में 12 बड़े आयोजन करने की अनुमति देने की योजना है। इससे नगर निगम पर रखरखाव का आर्थिक बोझ कम होगा और उद्यानों की स्थिति बेहतर बनाई जा सकेगी।
नए साल से लागू होगा डिजिटल डैशबोर्ड
कचरा वाहनों के संचालन, रखरखाव और डीजल व्यवस्था को एक ही अनुबंध के तहत लाने के लिए नगर निगम मेगा टेंडर की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। चेन्नई और भुवनेश्वर में काम कर चुकी कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। प्री-बिड से जुड़े सवालों का निराकरण होने के बाद अगले 15 से 20 दिनों में निविदाएं खोलने की तैयारी है।
नगर निगम की योजना नए साल से डिजिटल डैशबोर्ड लागू करने की है। इसके जरिए शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा वाहनों की निगरानी और शिकायतों के निराकरण को एक ही प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जा सकेगा। यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है तो रायपुर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
