चार्जशीट में बड़ा खुलासा: महादेव सट्टा नेटवर्क को बचाने वाले शुरुआती जांच अधिकारी ही सीबीआई के घेरे में, सबूतों के साथ दिल्ली तलब
रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक उलटफेर सामने आया है। इस बहुचर्चित सट्टा नेटवर्क की प्रारंभिक जांच करने वाले पुलिस और जांच अधिकारी ही अब सीबीआई की रडार पर आ गए हैं। सीबीआई निदेशक के पास पहुंची गोपनीय शिकायत में खुलासा हुआ है कि प्रारंभिक जांच में कई अफसरों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सिंडिकेट के मुख्य फाइनेंसरों और मददगारों को जानबूझकर जांच के दायरे से बाहर कर दिया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने राज्य के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए सीधे दिल्ली तलब किया है। प्रदेश भर में दर्ज 80 से अधिक एफआईआर वाले इस मामले में अब तक केवल 12 केस में चार्जशीट पेश हो सकी है।
प्रभावशाली नामों को बचाने की साजिश का भंडाफोड़
सीबीआई मुख्यालय से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, शिकायत में सीधा आरोप है कि जो लोग मामले के मास्टरमाइंड थे जांच अधिकारियों ने उनका नाम ही गायब कर दिया। जांच अधिकारी एएसपी अजीत सिंह की टीम अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। फोकस इस बात पर है कि प्रोटेक्शन मनी का लेन-देन राज्य की सीमा में किन-किन सफेदपोशों तक पहुंचा और क्या बाहरी राज्यों के प्रभावशाली लोगों तक भी इसका हिस्सा जा रहा था।
प्रमोटर सौरभ चंद्राकर से होगा आमना-सामना
सीबीआई इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए महादेव एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को दिल्ली ला चुकी है। एजेंसी ने उन अधिकारियों, कर्मचारियों और राजनेताओं की एक सूची तैयार कर ली है जिन्हें सौरभ के सामने बैठाकर क्रॉस इंटेरोगेशन किया जाएगा। उससे नेटवर्क की स्थापना, निवेश के स्रोत, और प्रशासनिक संरक्षण देने वाले चेहरों को लेकर लगातार सवाल किए जा रहे हैं।
इन कारोबारियों और पुलिसकर्मियों से होगी दोबारा पूछताछ
जांच को भटकाने की थ्योरी सामने आने के बाद सीबीआई ने उन संदिग्धों को दोबारा रडार पर लिया है जिन्हें पुलिस ने पहले छोड़ दिया था या मामूली कार्रवाई की थी। इस फेहरिस्त में प्रमुख कारोबारी विकास गर्ग, अमित कुमार अग्रवाल, नितिन तिबड़ेवाल, हरीश तिबड़ेवाल, रोहित गुलाटी, गिरीश तलरेजा और सुरेश चोखानी का नाम सबसे ऊपर है। इसके साथ ही विभागीय भूमिका को लेकर एएसआई चंद्रभूषण वर्मा, सिपाही सहदेव यादव और अर्जुन समेत अन्य संदिग्धों को भी जांच एजेंसी ने नोटिस भेजा है।
प्रत्यर्पण की कानूनी तैयारी: अरबी में 3200 पन्नों का दस्तावेज
सट्टा सिंडिकेट के सह-संस्थापक रवि उप्पल को यूएई से भारत लाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई अंतिम दौर की कागजी कार्रवाई में जुटे हैं। उप्पल के खिलाफ सबूतों का 3200 पन्नों की रिपोर्ट अंग्रेजी के साथ अरबी भाषा में तैयार की जा रही है। इसके पूरा होते ही दुबई की अदालत में प्रत्यर्पण की अपील की जाएगी। जांच एजेंसियों का दावा है कि दिसंबर तक रवि उप्पल को हर हाल में भारत ले आया जाएगा।
जांच के पन्नों से 3 बड़े खुलासे
दुबई में 50 युवतियां और उप्पल नजरबंद
इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस पर रवि उप्पल को पहली बार दिसंबर 2023 में दुबई में हिरासत में लिया गया था। बाद में नवंबर 2025 में उसे फिर नजरबंद किया गया और देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी गई। 1 नवंबर को उसे अरेस्ट वारंट देकर दुबई पुलिस ने औपचारिक हिरासत में ले लिया है। बड़ा खुलासा यह है कि दुबई में उप्पल के साथ 50 से अधिक युवतियां भी नजरबंद हैं, जो सीधे तौर पर ऑनलाइन सट्टा पैनल और कॉल सेंटर चला रही थीं।
80 मुकदमों में सिर्फ 12 पर ही एक्शन
राज्य के अलग-अलग थानों में महादेव एप को लेकर 80 से ज्यादा केस दर्ज हुए थे। सीबीआई ने फिलहाल रायपुर के तेलीबांधा, गंज और खमतराई, दुर्ग के छावनी और मोहन नगर तथा अंबिकापुर से जुड़े 12 मामलों को टेकओवर कर चार्जशीट पेश की है। पुलिस ने जिन निचले स्तर के गुर्गों को पकड़ा था, फिलहाल सीबीआई ने भी अपनी चार्जशीट उन्हीं तक सीमित रखी है। असली मगरमच्छ अभी भी बाहर हैं।
श्रीलंका तक फैला नेटवर्क
दुबई के अलावा सट्टा एप का एक बड़ा कंट्रोल रूम श्रीलंका से भी ऑपरेट हो रहा था। हालिया जांच के बाद श्रीलंका में भी कुछ बड़े सट्टा ऑपरेटरों की गिरफ्तारी हुई है, जिनकी जानकारी अब भारतीय जांच एजेंसियां वहां की पुलिस से साझा कर रही हैं।
आगे की जांच: सीबीआई अगले हफ्ते प्रोटेक्शन मनी के लेन-देन में इस्तेमाल हुए कुछ बड़े बैंक खातों को सीज कर सकती है। साथ ही, श्रीलंका से गिरफ्तार हुए गुर्गों की पूरी डिटेल के लिए विदेश मंत्रालय के जरिए संपर्क साधा जा रहा है।
