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आबकारी टेंडर में 300 करोड़ का खुला खेल: एक ही मालिक को मिले दो ठेके, NHAI से ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर भी मेहरबानी
रायपुर। छत्तीसगढ़ का आबकारी विभाग एक बार फिर बड़े घोटाले की ओर बढ़ रहा है। शराब घोटाले की कालिख अभी धुली भी नहीं थी कि अब 300 करोड़ रुपए के मैनपावर टेंडर में भारी गोलमाल सामने आ गया है। इस टेंडर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। टेंडर की शर्तों को ताक पर रखकर एक ही मालिक की दो कंपनियों को करोड़ों का काम दे दिया गया। हद तो तब हो गई जब टोल प्लाजा में फर्जीवाड़े के आरोप में डिबार (ब्लैकलिस्टेड) हो चुकी कंपनी को भी इस टेंडर में चुन लिया गया। शिकायतों के बाद अब अफसर लीपापोती में जुट गए हैं।
नियमों को ठेंगा, एक ही मालिक की दो कंपनियों पर कृपा
छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने राज्य के 8 जोन में मैनपावर सप्लाई के लिए यह टेंडर निकाला था। टेंडर की सबसे बड़ी और अहम शर्त यह थी कि एक ही मालिक की दो कंपनियों को काम नहीं दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा कंपनियों से लिखित में हलफनामा लिया गया था कि उनकी कोई दूसरी कंपनी इस टेंडर में शामिल नहीं है। लेकिन 25 मार्च को जब 8 कंपनियों को ठेका मिला, तो विभाग का सारा खेल खुल गया।
चुनी गई 8 कंपनियों में 'एसआईएस कैश सर्विसेस लिमिटेड' और 'डस्टर टोटल सॉल्युशन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड' शामिल हैं। आरोप है कि ये दोनों कंपनियां एक ही व्यक्ति की हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों कंपनियों के मालिक भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रितुराज किशोर सिन्हा हैं। यह बात सामने आते ही हड़कंप मच गया है। सवाल यह है कि जब लिखित में लिया गया था, तो दस्तावेजों की जांच के समय अफसरों ने अपनी आंखें क्यों मूंद रखी थीं?
दागी और डिबार कंपनी को भी थमा दिया करोड़ों का काम
भ्रष्टाचार की हद यहीं पार नहीं हुई। ठेका पाने वाली 8 कंपनियों में 'इनोविजन लिमिटेड' का नाम भी शामिल है। इस कंपनी का दामन पहले से दागदार है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने 25 जुलाई 2025 को टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़े और अवैध वसूली के गंभीर आरोप में इस कंपनी को एक साल के लिए डिबार कर दिया था। इसके साथ ही कंपनी का अनुबंध भी रद्द कर दिया गया था।
हालांकि, डिबारमेंट के आदेश पर कंपनी ने कोर्ट से स्टे ले रखा है और मामला अभी कोर्ट में है। लेकिन शिकायतकर्ताओं ने सीधा सवाल उठाया है कि जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ऐसी दागी कंपनी को 300 करोड़ के सरकारी काम में कैसे शामिल किया जा सकता है?
चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेलर-मेड थीं शर्तें
इस टेंडर की शर्तें शुरू से ही सवालों के घेरे में थीं। 300 करोड़ के काम के लिए कंपनी का टर्नओवर भी 300 करोड़ ही मांगा गया था। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि इस बड़े काम के लिए 'समान प्रकृति के काम' (Similar work experience) का अनुभव ही नहीं मांगा गया। बस 3 साल से प्लेसमेंट कंपनी चलाने वाले किसी भी व्यक्ति को टेंडर भरने की छूट दे दी गई। इस मनमानी की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक की गई है।
कुल 148 कंपनियों ने लिया था हिस्सा, ये 8 हुईं सिलेक्ट
मैनपावर टेंडर में 148 कंपनियों ने दावेदारी की थी। तकनीकी और प्राइज बिड के बाद जिन 8 कंपनियों का चयन हुआ, वे हैं:
- बाम्बे इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी इंडिया लिमिटेड
- डस्टर टोटल सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
- इनोविजन लिमिटेड
- इनोवसोर्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड
- पैरेग्रीन गार्डनिंग प्राइवेट लिमिटेड
- एसआईएस कैश सर्विस लिमिटेड
- स्पैक्ट्रम टैलेंट मैनेजमेंट लिमिटेड
- टीम एचआरजीएसए प्राइवेट लिमिटेड
अब अफसरों का रटा-रटाया जवाब
मामला गर्माने के बाद आबकारी विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र भारद्वाज का कहना है कि तीन कंपनियों के खिलाफ शिकायत मिली है। एक ही संस्था की दो कंपनियों और डिबार हुई कंपनी से लिखित जवाब मांगा जा रहा है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
