NJV SPECIAL राजधानी में माणिक मेहता की मौत पर सस्पेंस! हत्या, आत्महत्या या हार्ट फेल? कहीं मिक्की मेहता हत्याकांड की तरह दफन तो नहीं हो जाएगा ये राज?
रायपुर:राजधानी रायपुर का पॉश डीडी नगर इलाका एक बार फिर एक गहरी और रहस्यमयी खामोशी में डूबा है। वजह है— माणिक मेहता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत। इस घटना ने न सिर्फ शहर के संभ्रांत हलकों में बल्कि पुलिस महकमे के भीतर भी हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया की बहसों से लेकर स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं के पन्नों तक, इस वक्त सिर्फ एक ही चर्चा सबसे ज्यादा गर्म है कि आखिर माणिक मेहता की मौत का असली कारण क्या है? क्या यह एक सुनियोजित हत्या है, हालात के आगे घुटने टेक कर की गई आत्महत्या है, या फिर महज एक हार्ट फेल?
लेकिन इन सबके बीच जो सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल राजधानी की फिजाओं में तैर रहा है, वह यह है कि क्या माणिक मेहता का मामला भी मिक्की मेहता की मौत—या सीधे शब्दों में कहें तो उस अनसुलझे मर्डर—की तरह ही पुलिस की फाइलों में हमेशा के लिए दफन होकर रह जाएगा?
पुलिस की चुप्पी से गहराता रहस्य
इस पूरे संवेदनशील मामले में रायपुर पुलिस का रवैया गंभीर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर यूजर्स लगातार यह पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी रायपुर पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पत्रकार वार्ता (Press Conference) क्यों नहीं की गई है? अमूमन छोटे-छोटे अपराधों के खुलासे में तुरंत मीडिया के सामने आने वाली पुलिस, इस हाई-प्रोफाइल मामले में रहस्यमयी चुप्पी क्यों साधे हुए है? खाकी की यह खामोशी ही इस शक को पुख्ता कर रही है कि दाल में कुछ काला जरूर है।
क्या महकमे के ही किसी 'अपने' को बचाने की है कवायद?
पत्र-पत्रिकाओं और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स (फेसबुक, एक्स) पर चल रहे इनपुट्स की मानें, तो इस पूरे मामले को रफा-दफा करने और दबाने का जोरदार प्रयास किया जा रहा है। दबी जुबान में ये गंभीर आरोप भी लग रहे हैं कि रायपुर पुलिस इस मामले में अपने ही विभाग से जुड़े रहे किसी रसूखदार व्यक्ति को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। क्या वाकई इस केस के तार महकमे के किसी 'खास' या पूर्व अधिकारी से जुड़े हैं? अगर पुलिस पाक-साफ है, तो शुरुआती तफ्तीश और पोस्टमार्टम के तथ्यों को जनता के सामने स्पष्ट क्यों नहीं किया जा रहा?
मिक्की मेहता पार्ट-2 बनने का डर
रायपुर के लोगों के जहन में मिक्की मेहता की मौत का अनसुलझा अध्याय आज भी ताजा है। उस मामले में भी न्याय सिर्फ फाइलों में भटकता रह गया। माणिक मेहता प्रकरण में पुलिस की इसी हीलाहवाली ने लोगों के मन में यह खौफ पैदा कर दिया है कि कहीं यह केस भी मिक्की मेहता पार्ट-2 की तर्ज पर हमेशा के लिए एक डार्क मिस्ट्री न बन जाए।
सोशल मीडिया पर निष्पक्ष न्यायिक जांच की उठी मांग
लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब सोशल मीडिया पर न्याय पसंद नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया है। चौतरफा सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है कि स्थानीय पुलिस की लीपापोती और किसी भी तरह के दबाव से बचने के लिए, माणिक मेहता की मौत की त्वरित और निष्पक्ष न्यायिक जांच (Judicial Probe) कराई जाए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक समिति से इस पूरे प्रकरण की जांच नहीं होती, तब तक असली गुनहगार सामने नहीं आएंगे।
