चार्जशीट में नया खुलासा: कोयले के बाद अब आयरन पैलेट पर भी 100 रुपए प्रति टन की वसूली, डायरी में IAS मौर्य को 1 करोड़ देने की ....
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले की आंच अब कोयला परिवहन से आगे बढ़कर आयरन पैलेट (लौह अयस्क) के परिवहन तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की ओर से अदालत में पेश किए गए छठे पूरक चालान (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि कोयले पर 25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली के साथ-साथ आयरन पैलेट के परिवहन पर भी 100 रुपए प्रति टन की लेवी वसूली जा रही थी। EOW के दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण देने में तत्कालीन भौमिकी एवं खनिकर्म संचालक व आईएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की अहम भूमिका रही है। जांच एजेंसी को एक सीक्रेट डायरी मिली है, जिसमें मौर्य को 1 करोड़ रुपए दिए जाने की स्पष्ट प्रविष्टियां (एंट्री) हैं। EOW ने फिलहाल पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे घोटाले का आकार करीब 500 करोड़ रुपए आंका है।
EOW की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवैध वसूली को संस्थागत रूप देने के लिए बकायदा सरकारी नियमों का सहारा लिया गया। 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और पैलेट परिवहन के लिए ‘अभिवहन पास’ व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। ठीक 20 दिन बाद, 5 जनवरी 2022 के आदेश के जरिए सड़क और रेल मार्ग से परिवहन के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इसी दौरान आईएएस जयप्रकाश मौर्य (निलंबित आईएएस रानू साहू के पति) ने पैलेट उद्योगपतियों की एक महत्त्वपूर्ण बैठक ली थी। आरोप है कि इसी बैठक में उद्योगपतियों को निर्देश दिए गए कि परिवहन पास के एवज में मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी या उसके गुर्गों को 100 रुपए प्रति टन की लेवी देनी होगी।
5 साल में 19 करोड़ टन उत्पादन, गणितीय आकलन 1900 करोड़ के पार
जांच एजेंसी के पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में लगभग 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ। अगर इस पूरे उत्पादन पर 100 रुपए प्रति टन की दर से वसूली की गणना की जाए, तो यह राशि 1,905 करोड़ रुपए तक पहुंचती है। इसी समयावधि में 81 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ, जिस पर 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से 2,025 करोड़ रुपए की अवैध वसूली का गणितीय आकलन सामने आ रहा है। हालांकि, जांच एजेंसी का स्पष्ट कहना है कि यह केवल गणितीय आकलन है, फिलहाल प्रमाणित दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर 500 करोड़ के घोटाले की पुष्टि की गई है।
जांच के अहम बिंदु
डायरी और डिजिटल साक्ष्य ने खोली पोल
छठे पूरक चालान में मौर्य से जुड़ी दो अहम डायरी प्रविष्टियों का उल्लेख है। नकद लेनदेन की इस कड़ी को पुख्ता करने के लिए EOW ने तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। इस फोन से आदेश लागू करने और लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य (चैट्स और डॉक्यूमेंट्स) रिकवर किए गए हैं।
सूर्यकांत तिवारी से सीधा संपर्क
चार्जशीट के अनुसार, आईएएस जेपी मौर्य खनिज विभाग से जुड़े मामलों में सीधे सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में थे। अवैध वसूली के नेटवर्क को निर्बाध रूप से चलाने और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के एवज में ही नकद रकम पहुंचाई जा रही थी।
आयरन पैलेट परिवहन से जुड़े आरोप शामिल होने के बाद इस घोटाले की जांच का दायरा काफी बड़ा हो गया है। जांच एजेंसी अब जब्त डिजिटल दस्तावेजों और डायरी प्रविष्टियों को लेवी नेटवर्क की कड़ियों से जोड़ रही है। EOW द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों, दस्तावेजों और साक्ष्यों का अंतिम परीक्षण अब न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में होगा। गवाहों के बयानों और जिरह के बाद ही यह तय होगा कि इस संगठित लेवी सिंडिकेट में किसकी कितनी जवाबदेही थी।
