बीएसपी स्क्रैप चोरी कांड का मास्टरमाइंड UP के देवरिया से गिरफ्तार: 90 लाख से अधिक का माल बरामद
भिलाई/दुर्ग | भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) से 250 टन लोहा चोरी होने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस पूरे संगठित स्क्रैप चोरी गिरोह के कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से धर दबोचा है।
मंगलवार को गिरफ्तार आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस लंबी पूछताछ के दौरान करोड़ों रुपये के इस अवैध स्क्रैप नेटवर्क से जुड़े कई और चौकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
कड़ी से कड़ी जोड़कर सरगना तक पहुंची पुलिस
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुरानी भिलाई थाने में दर्ज इस प्रकरण में संजय सिंह लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस की एक विशेष टीम लगातार उसके ठिकानों पर नजर रख रही थी, जिसके बाद उसे यूपी में ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मामले के एक अन्य अहम आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पुलिस अब इन दोनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर उनके पूरे सिंडिकेट, रुपयों के लेन-देन और नेटवर्क में शामिल अन्य मददगारों की भूमिका को खंगालने की तैयारी कर रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुख्य आरोपी संजय सिंह (48 वर्ष) खुर्सीपार, भिलाई का मूल निवासी है, जबकि पकड़ा गया दूसरा आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा (48 वर्ष) सेक्टर-05 भिलाई में रहता है। इस पूरे सिंडिकेट में संजय सिंह का बेटा अभय सिंह भी बराबर का साझीदार है, जो अभी फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
बाप-बेटे पर घोषित था 10-10 हजार का इनाम
शुरुआती जांच के बाद से ही दुर्ग पुलिस ने संजय सिंह और उसके बेटे अभय सिंह को इस पूरे स्क्रैप चोरी सिंडिकेट का मुख्य संचालक माना था। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए दोनों लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे, जिसके कारण पुलिस प्रशासन ने उन पर 10-10 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था।
इस बड़े मामले की शुरुआत इसी साल 26 मई को हुई थी, जब भिलाई-3 थाना क्षेत्र के अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स स्क्रैप यार्ड में पुलिस ने अचानक दबिश दी थी। उस छापेमारी के दौरान यार्ड परिसर और वहां खड़े हाइवा वाहनों से लगभग 250 टन भारी लौह सामग्री जब्त की गई थी, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 90 लाख रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है।
फ्लाई एश की आड़ में छिपाई जाती थी लोहे की प्लेटें
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिराना तरीके से प्लांट से लोहा पार कर रहे थे। वे फ्लाई एश के वैध परिवहन की आड़ लेकर गाड़ियों में नीचे लोहे की भारी प्लेटें, बीम और अन्य कीमती स्क्रैप लोड करते थे और ऊपर से उसे फ्लाई एश से पूरी तरह ढक देते थे।
यार्ड से पकड़े गए हाइवा चालकों ने पूछताछ में कबूल किया था कि वे इसी चालाकी का इस्तेमाल कर अब तक 30 से 40 बार बीएसपी प्लांट के भीतर से स्क्रैप सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। इस बयान के बाद से ही पुलिस गिरोह के मुख्य सरगना संजय सिंह की तलाश में जुट गई थी।
10 बैंक खाते सीज, वित्तीय साम्राज्य पर नजर
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने आरोपी संजय सिंह के घर की तलाशी ली थी, जहां से 10 अलग-अलग राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों की पासबुक और चेकबुक बरामद हुई थीं। पुलिस ने तत्काल कदम उठाते हुए इन सभी बैंक खातों को पूरी तरह सीज करवा दिया है।
अब पुलिस की वित्तीय जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी के लोहे को बेचकर कमाए गए करोड़ों रुपये किन-किन खातों में भेजे गए। इस मामले में पुलिस मीथेन ठाकुर, चिंतानंद साहू, गीतेश वर्मा, निर्मल सिंह और घनश्याम गुप्ता समेत कई आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है।
बीएसपी के अंदरूनी अधिकारियों पर भी गहराया शक
जांच के दायरे में अब भिलाई स्टील प्लांट के अंदरूनी तंत्र से जुड़े लोग भी आ गए हैं। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि बीएसपी जैसे अति-सुरक्षित परिसर से, जहां अत्याधुनिक ट्रैकिंग और सुरक्षा व्यवस्था लागू है, वहां से सैकड़ों टन लोहा बिना किसी आंतरिक मदद के बाहर नहीं भेजा जा सकता।
यही वजह है कि अब प्लांट के कुछ चुनिंदा कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और तकनीकी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी बारिकी से जांच की जा रही है। पुलिस को पूरी उम्मीद है कि संजय सिंह की सात दिनों की रिमांड अवधि के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़े बीएसपी के कई बड़े चेहरों के नाम उजागर हो सकते हैं।
