पीएमओ की जांच दबाने वाले आबकारी के करोड़पति बाबू का जिन्न फिर बाहर; कमिश्नर से शिकायत, लेकिन जांचकर्ता पर ही उठे सवाल

पीएमओ की जांच दबाने वाले आबकारी के करोड़पति बाबू का जिन्न फिर बाहर; कमिश्नर से शिकायत, लेकिन जांचकर्ता पर ही उठे सवाल

बिलासपुर। भ्रष्टाचार और दो नंबर की काली कमाई से करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाले आबकारी विभाग के दागी लिपिक दिनेश दुबे का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस रसूखदार और करोड़पति बाबू के खिलाफ अब सीधे आबकारी कमिश्नर पदुम सिंह एलमा के पास गंभीर शिकायत पहुंची है। दस्तावेजों और पुरानी जांच रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने तुरंत नई जांच के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन जांच का जिम्मा जिसे मिला है, उसी पर सबसे बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच उसे, जिसने पहले भी बचाया था!

चूंकि पूरा मामला बिलासपुर जिले का है, तो कायदे से इसकी जांच भी बिलासपुर के ही अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमिश्नर ने राज्य उड़न दस्ते के प्रभारी को जांच सौंप दी है। सूत्रों की मानें तो जिस अधिकारी को यह जांच सौंपी गई है, उसके और इस दागी बाबू के बेहद करीबी संबंध हैं। पिछली बार भी इसी अधिकारी ने बाबू को बचाने में पूरी मदद की थी। अब देखना यह है कि क्या इस बार बाबू पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या पुरानी फाइलों की तरह यह नई जांच भी मिलीभगत की भेंट चढ़ जाएगी?

सिस्टम पर भारी बाबू, पीएमओ के आदेश को भी दिखाया ठेंगा

इस मामूली से लिपिक की विभाग में पैठ का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि इसके खिलाफ सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जांच के आदेश आ चुके हैं। भ्रष्टाचार की इन गंभीर शिकायतों पर खुद पीएम मोदी ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। लेकिन, सिस्टम में बैठे इस बाबू के आकाओं ने पीएमओ के आदेश को ही फाइलों में दफन कर दिया। जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार में करोड़ों का घपला सामने आने के बाद भी इस बाबू का बाल तक बांका नहीं हुआ। वह आज भी मजे से अपनी कुर्सी पर जमा है और पूरा प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

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ऐसे खुला था काली कमाई का कच्चा चिट्ठा

दिनेश दुबे के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा सबसे पहले तत्कालीन रिटायर्ड सहायक आयुक्त (आबकारी) पीसी अग्रवाल ने खोला था। उन्होंने 12 अगस्त 2017 को पीएमओ में इस बाबू की बेहिसाब संपत्ति की शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने दिनेश पर एफआईआर दर्ज की थी। उस दौरान आबकारी उड़नदस्ता में पदस्थ सहायक आयुक्त वीआर लहरे ने जांच की, जिसमें पूरी तरह साबित हो गया था कि दिनेश ने अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों की काली कमाई की है। अब इसी मामले को आधार बनाकर कमिश्नर से नई शिकायत की गई है।

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पिछली जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया था कि दिनेश दुबे ने अपनी काली कमाई को खपाने के लिए नोटबंदी का जमकर फायदा उठाया था:

 परिवार के खातों में डंप किए लाखों

 सरकंडा एसबीआई में 4 नवंबर 2016 से 29 दिसंबर 2017 के बीच 16.71 लाख जमा किए और 15.64 लाख निकाले। पत्नी मिनाक्षी के खाते में 5.04 लाख और बेटे आदित्य के खाते में 3.90 लाख रुपए डाले गए। छोटी-बड़ी नगद रकम लगातार खातों में घूमती रही।

 चपरासी बने एटीएम थे एटीएम

नोटबंदी के दौरान आबकारी के चपरासी जीआर महार के खाते में 5.15 लाख रुपए खपाए गए। दूसरे चपरासी हीरालाल के खाते में 1.51 लाख, संतोष कुमार के खाते में 40 हजार और नरेश के खाते में 2 लाख रुपए जमा करा दिए गए।

नौकरी के बाद खड़ा किया बेतहाशा संपत्तियों का साम्राज्य

सरकारी नौकरी में आने के बाद एक छोटे से पद पर रहते हुए दिनेश ने बेतहाशा संपत्तियां बटोरी हैं। शहर के कुदुदंड में इसका एक आलीशान मकान है। इसके अलावा गंगानगर में दो मंजिला मकान, भारतीय नगर और व्यापार विहार जैसे पॉश इलाकों में भी घर हैं। चकरभाठा के ग्राम चिचिरदा में दो बड़े फार्म हाउस और मस्तूरी के अपने गृहग्राम पाराघाट में लंबी-चौड़ी खेती की जमीन इसी बाबू के नाम पर दर्ज है। ये सारी संपत्तियां इसकी काली कमाई का ही नतीजा हैं।

पीएमओ स्तर की जांच को फाइलों में दबा देने वाला यह शातिर लिपिक अब तक हर कार्रवाई से बचता आया है। अब आबकारी कमिश्नर के नई जांच के निर्देश से विभाग में एक बार फिर हड़कंप मच गया है।

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