करोड़ों की एफडी और नौकरों के नाम जमीन? विधायक अजय चंद्राकर की बेनामी संपत्ति पर ईडी की बड़ी जांच

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति के दिग्गज और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर इन दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के रडार पर हैं। जांच एजेंसी उन संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा खंगाल रही है जो कथित तौर पर साल 2003 से 2016 के बीच बनाई गई थीं। आरोप है कि विधायक ने अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल कर करीब 1000 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का जाल बुना। इस खेल में रिश्तेदारों से लेकर घर में काम करने वाले छोटे कर्मचारियों तक के नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सत्ता में मजबूत पकड़ होने के कारण विधायक चंद्राकर साल 2018 में समन मिलने के बावजूद अब तक ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं, जिससे जांच की प्रक्रिया अटकी हुई है।

नौकरों के नाम पर करोड़ों का लेनदेन और जमीनों का खेल

ईडी के सूत्रों के मुताबिक जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि विधायक के करीबी कहे जाने वाले घरेलू सहायकों और चपरासियों के बैंक खातों से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। करीब 3.09 करोड़ रुपये की नगदी इन छोटे कर्मचारियों के नाम पर निकाली और जमा की गई है। इसके अलावा कुरूद के बंजारी गांव में करीब 17 एकड़ जमीन एक बाहरी कंपनी के नाम पर लेकर वहां सरकारी मदद से पावर प्लांट खड़ा करने का भी आरोप है। सूत्रों का कहना है कि कागजों पर मालिक कोई भी हो, लेकिन इन जमीनों का असली नियंत्रण विधायक के करीबियों के पास ही रहता है।

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अरबों की एफडी और बेनामीदारों की लंबी फौज

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जांच एजेंसी के हाथ जो आंकड़े लगे हैं, वे हैरान करने वाले हैं। साल 2008 से 2016 के बीच विधायक और उनके करीबियों के खातों में 1200 से 2000 करोड़ रुपये तक की एफडी होने का अनुमान लगाया गया है। जांच में कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जिनके पास करोड़ों की जमीनें हैं:

  • बजरंग अग्रवाल और उनकी पत्नी: इनके नाम 47.47 एकड़ जमीन है, जहां शराब दुकान और मशीनें लगी मिलीं।
  • दीपक और योगिता गांधी: इनके नाम पर 15 एकड़ से ज्यादा की कीमती जमीन दर्ज है।
  • रमेश चंद्र (हैदराबाद): इनके नाम पर 17 एकड़ जमीन लेकर सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने का आरोप है।
  • ठेकेदार कंपनियां: एक कंपनी के नाम 10 एकड़ जमीन महज 1 करोड़ में दिखाई गई, जो जांच के घेरे में है।
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6 साल से पेशी का इंतजार, रसूख के आगे कानून बेबस!

ईडी ने इस मामले को बेहद गंभीर श्रेणी (PMU Case) में रखा है। 2017 और 2018 में कई बार कड़े पत्र लिखकर बैंकों और रजिस्ट्री दफ्तरों से जानकारी जुटाई गई। 2018 में ही अजय चंद्राकर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे आज तक जांच अधिकारी के सामने हाजिर नहीं हुए। जानकारों का कहना है कि सरकार के खास नुमाइंदे होने के कारण कार्रवाई की रफ्तार धीमी है। जब तक विधायक खुद पेश होकर अपना पक्ष नहीं रखते, तब तक करोड़ों के इस 'आर्थिक साम्राज्य' का पूरा सच सामने आना मुश्किल है।

 

डिस्क्लेमर: यह खबर ईडी की जांच रिपोर्ट और सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। मामले में अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगा।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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