बिल्हा स्वास्थ्य केंद्र घोटाला: 2018 से बिना एक्सटेंशन जमे बीपीएम की फाइल ओपन, रायपुर की टीम ने खंगाले 2000 पन्नों के दस्तावेज

बिल्हा स्वास्थ्य केंद्र घोटाला: 2018 से बिना एक्सटेंशन जमे बीपीएम की फाइल ओपन, रायपुर की टीम ने खंगाले 2000 पन्नों के दस्तावेज

बिलासपुर/बिल्हा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से चल रही वित्तीय गड़बड़ियों की जांच अब शुरू हुई है। तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी मधुरिमा श्रीवास और विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) अनिल गढ़ेवाल के कार्यकाल में हुए लाखों रुपए के कथित गोलमाल की पड़ताल के लिए रायपुर से राज्य स्तरीय जांच दल सोमवार को बिल्हा पहुंचा। एनएचएम आयुक्त और अपर संचालक (वित्त) के निर्देश पर गठित छह सदस्यीय समिति में से तीन सदस्यों ने बिल्हा बीएमओ कार्यालय में फाइलों की जांच की। जांच टीम ने लगभग 2000 पन्नों के पुराने दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया और इनमें से 200 पन्नों की एक विस्तृत फाइल तैयार कर अपने साथ ले गई। टीम द्वारा यह रिपोर्ट एनएचएम डायरेक्टर को सौंपी जाएगी।

गठित जांच समिति के मुखिया अपर संचालक वित्त भावेश दुबे है। इस टीम में डॉ. प्रदीप टंडन, आनंद साहू, मनोज तिवारी, लिखमत दास और रविंद्र सिन्हा शामिल किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला साल 2014 से 2021 के मध्य जीवनदीप समिति और अन्य मदों में किए गए खर्च तथा फर्जी बिलिंग से संबंधित है।

नियम बदलकर खुद बने द्वितीय हस्ताक्षरी

Read More सिस्टम की बड़ी नाकामी: प्रदेश के 29 हजार टीबी मरीजों की 'पोषण राशि' अटकी, 4 महीने से नहीं मिला एक भी रुपया

दस्तावेजों के प्रारंभिक जांच से पता चला है कि तत्कालीन बीपीएम ने जीवनदीप समिति के बैंक खातों के संचालन में भारी अनियमितता की। बिना साधारण सभा की बैठक बुलाए नियमों में संशोधन कर बीपीएम को समिति में द्वितीय हस्ताक्षरी बना दिया गया। इसके उपरांत चेक पर हस्ताक्षर किए गए और कई बिल पास कर दिए गए। वित्तीय अधिकार न होने के बावजूद 9 माइक्रोस्कोप की खरीदी का प्रकरण भी इसी जांच के दायरे में है। इसके अतिरिक्त, बेलतरा में लगभग 52 हजार रुपए के बिल पास किए गए, जिस पर मिशन संचालक द्वारा पूर्व में नोटिस जारी किया गया था, परंतु कोई वसूली की कार्रवाई नहीं की गई।

Read More तबादला आदेश जारी होते ही भुगतान पर ताला जल संसाधन विभाग में एमआईएस प्रभारी ने बिना चार्ज हैंडओवर के ब्लॉक की कार्यपालन अभियंताओं की आईडी

 

फर्जी दवा खरीदी और स्टॉक में हेराफेरी

 

शिकायतों के अनुसार गड़बड़ियां केवल एक स्तर पर नहीं की गईं। शहर की एक मेडिकल एजेंसी को बिना तुलनात्मक अध्ययन के दवाओं का आर्डर दिया गया। 24 सामग्रियां मंगाई गईं, जिनमें से केवल 15 अस्पताल पहुंचीं। शेष 9 सामग्रियां, जिनका मूल्य लगभग 20,342 रुपए था, बिना आपूर्ति के ही उनके बिल पास कर दिए गए। तत्कालीन बीएमओ डॉ. देवेश प्रधान ने भी इसे फर्जी बताते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को लिखित शिकायत प्रेषित की थी। क्रय नियमों को दरकिनार कर बिलों पर 'पेड इन कैश' (नकद भुगतान) लिखकर राशि आहरित की गई और सामग्री की प्रविष्टि भंडार पंजी (स्टॉक रजिस्टर) में नहीं की गई। एसी जैसे उपकरणों की स्थापना का भुगतान हुआ, परंतु भंडार पंजी में कोई उल्लेख नहीं मिला। लिंगियाडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 2 लाख के फंड पर 4 लाख खर्च करने और काजू-किशमिश-छोहारा के नाम पर फर्जी बिल लगाने के भी आरोप हैं।

 

स्वास्थ्य सूचकांक गिरे, संविदा विस्तार का पता नहीं

 

इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी लापरवाही देखने को मिली। अनिल गढ़ेवाल साल 2018 के बाद से बिना किसी अधिकृत संविदा एक्सटेंशन के अपने पद पर कार्य कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास उनके संविदा विस्तार का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है और अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें किस मद से वेतन दिया जा रहा है। पूर्व में 2017 में भी मिशन संचालक ने उनके कार्यकाल को केवल तीन माह के कार्य सुधार नोटिस पर बढ़ाया था। उस दौरान बिल्हा ब्लॉक के स्वास्थ्य सूचकांकों में गिरावट भी दर्ज की गई थी; गर्भवती पंजीयन 2015-16 में 85.23% से गिरकर 2016-17 में 84.31% हो गया था, और टीकाकरण का आंकड़ा 89.88% से 86.65% पर आ गया था।

ईओडब्ल्यू और एसीबी तक पहुंची थी शिकायतें

छ.ग. प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ तथा अन्य लोगों ने इस मामले को लेकर ईओडब्ल्यू (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में भी शिकायत दर्ज कराई थी। संघ ने सूचना के अधिकार (RTI) से दस्तावेज प्राप्त कर 60 से 70 लाख रुपए की अनियमितता का दावा किया था, जिसमें चकरभाठा, हरदीकला, लखराम और बेलतरा जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जीवनदीप समितियां शामिल हैं। लगातार शिकायतों के बाद एनएचएम आयुक्त ने इस नई जांच समिति का गठन किया है।

इस पूरी कार्रवाई पर बिल्हा अस्पताल के वर्तमान बीएमओ डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि रायपुर से जांच टीम आई थी। मामला पुराना है, इसलिए उन्हें इसकी अधिक जानकारी नहीं है। जांच दल ने जिन दस्तावेजों की मांग की, वे सभी उन्हें उपलब्ध करा दिए गए हैं।

Tags:

Latest News

स्कूल के क्लासरूम में 9 साल की बच्ची की अचानक मौत, मचा हड़कंप; अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत स्कूल के क्लासरूम में 9 साल की बच्ची की अचानक मौत, मचा हड़कंप; अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत
महासमुंद में जुआ फड़ पर पुलिस की बड़ी दबिश, 8 जुआरी गिरफ्तार; 5.16 लाख का सामान जब्त
जांजगीर-चांपा में दोहरे हत्याकांड का बड़ा फैसला: शराब में कीटनाशक मिलाकर पिलाने वाले आरोपी को दो बार उम्रकैद
अग्निवीरों को दिवाली से पहले बड़ा तोहफा! 4 नहीं, अब 6 साल तक मिलेगी नौकरी, 75% जवानों को 2 साल का एक्सटेंशन
आईएएस को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश निरस्त, 90 दिन में नए सिरे से जांच के निर्देश, तब तक सेवा-पेंशन पर कार्रवाई नहीं
NEET PG एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब परसेंटाइल नहीं, रैंक से मिलेगा मेडिकल कॉलेजों में दाखिला, NMC ने दी सैद्धांतिक मंजूरी
14 एकड़ जमीन देने वाले बीएसपी का ट्रस्ट से प्रतिनिधित्व खत्म, 2018 के संशोधन पर हाई कोर्ट ने दी दीवानी अदालत जाने की राह
सौरभ चंद्राकर की वापसी के बाद गरमाई सियासत, बैज ने पूछा- रवि उप्पल और शुभम सोनी कब आएंगे भारत?
गन्ना किसानों को साय सरकार का बड़ा तोहफा, 31 हजार किसानों को मिलेगा 51 करोड़ का बोनस
महादेव सट्टा ऐप केस में सौरभ चंद्राकर से होगी CBI की पूछताछ, CM विष्णुदेव साय बोले- कई और नामों का हो सकता है खुलासा
सुकमा में अवैध शराब तस्करी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 48.740 बल्क लीटर शराब जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार
बिना रेरा पंजीयन प्लॉट बेचने पर बालाजी बिल्डर्स पर 20 लाख का जुर्माना, जानिए पूरा मामला