किसानों के विरोध के बीच अमाली की कोलवॉशरी को NOC की तैयारी, 20 गांवों पर असर का दावा; हाईकोर्ट जाएंगे किसान
बिलासपुर। कोटा के अमाली गांव में मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित कोलवॉशरी को लेकर किसानों का विरोध अब न्यायालय तक पहुंचने जा रहा है। जून में हुई जनसुनवाई में व्यापक विरोध के बावजूद कंपनी को प्रशासन से एनओसी मिलने की सुगबुगाहट के बाद किसानों ने जमीन बचाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि जमीन ही परिवार के भरण-पोषण का मुख्य साधन है, इसलिए वे किसी भी स्थिति में जमीन नहीं देंगे।
किसानों के अनुसार कोलवॉशरी स्थापित होने से खेतों की फसलों पर असर पड़ने और क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। उनका दावा है कि प्रस्तावित उद्योग से अमाली सहित आसपास के करीब 20 गांव प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से किसान पहले जनसुनवाई में विरोध दर्ज करा चुके हैं और अब न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में हैं।
एक साल में दो बार जनसुनवाई निरस्त
कोलवॉशरी के विरोध का सिलसिला नया नहीं है। दिसंबर 2025 और मई 2026 में कोटा कॉलेज में प्रस्तावित जनसुनवाई भारी विरोध के कारण निरस्त हो चुकी है। इसके बाद जून में हुई जनसुनवाई में भी किसानों और ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। बीते मई में कोटा कॉलेज में हुई जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान कोलवॉशरी खोले जाने का विरोध करने पहुंचे थे।
पंचायत की NOC को फर्जी बताने का आरोप
पूर्व में ग्रामीणों ने जनसुनवाई का विरोध करते हुए ग्राम पंचायत की ओर से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को फर्जी बताया था। किसानों का कहना था कि पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा और पेसा समिति की अनुमति ही वैध है। ग्रामीणों ने उद्योग नीति के उल्लंघन का भी आरोप लगाया था।
किसानों का कहना था कि मेसर्स विराज के पास औद्योगिक डायवर्सन की कॉपी नहीं है। जमीन को औद्योगिक घोषित किए बिना जनसुनवाई कराना गंभीर अनियमितता है। अब जून की जनसुनवाई के बाद कंपनी को एनओसी देने की तैयारी की जानकारी मिलने से किसानों का विरोध और तेज हो गया है।
विधायक भी कर चुके हैं आपत्ति
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव भी प्रस्तावित कोलवॉशरी का विरोध कर चुके हैं। उनका कहना है कि कोलवॉशरी की स्थापना से आसपास के करीब 20 गांव प्रभावित होंगे। उन्होंने कोटा एसडीएम को पत्र लिखकर पर्यावरण प्रभाव आकलन, पर्यावरण प्रबंधन योजना, रिस्क एवं डिजास्टर प्लान और ग्राम सभा के प्रस्ताव सहित संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में उन्होंने कलेक्टर बिलासपुर से भी चर्चा की थी।
किसान बोले- जमीन बचाने कोर्ट जाएंगे
पूर्व में हुई जनसुनवाई में सभी किसान प्रस्तावित कोलवॉशरी खोले जाने के विरोध में अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। इसके बावजूद कोलवॉशरी खोले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आने पर किसान अब अपनी जमीन बचाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाने के लिए न्यायालय की शरण में जाने का मन बना चुके हैं।
संदीप शुक्ला, पूर्व मंडी अध्यक्ष कोटा ने कहा कि किसानों के विरोध के बावजूद कोलवॉशरी खोली जा रही है। उनका कहना है कि किसान अपनी जमीन किसी भी स्थिति में नहीं देना चाहते।
पूरी रिपोर्ट दिल्ली भेजी, NOC की जानकारी नहीं
रश्मि श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी बिलासपुर ने कहा कि जनसुनवाई के बाद जो भी समर्थन में या विरोध में आपत्तियां आई थीं, उन्हें दिल्ली स्थित आवास पर्यावरण, वन व जलवायु मंत्रालय को भेज दिया गया है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया वहीं से होगी। एनओसी संबंधित कोई जानकारी नहीं आई है।
