क्या दागी अफसर के हाथ में जाएगी ईएनसी की कुर्सी? 54 हजार की घूस में जेल की हवा खा चुके मक्सी कुजूर का नाम भी रेस में!

क्या दागी अफसर के हाथ में जाएगी ईएनसी की कुर्सी? 54 हजार की घूस में जेल की हवा खा चुके मक्सी कुजूर का नाम भी रेस में!

रायपुर।छत्तीसगढ़ के जल संसाधन (सिंचाई) विभाग में इन दिनों एक अलग ही खेल चल रहा है। मौजूदा प्रमुख अभियंता (ईएनसी) शंकर ठाकुर 30 जून को रिटायर हो रहे हैं और उनकी कुर्सी खाली होने वाली है। अब इस मलाईदार कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसे लेकर विभाग में तगड़ी सेटिंग-गेटिंग शुरू हो गई है। दावेदारों की लिस्ट लंबी है, लेकिन इस लिस्ट में एक ऐसा नाम भी घुसपैठ कर चुका है, जिसका पुराना काला चिट्ठा सुनकर आप भी अपना माथा पीट लेंगे।

यूं तो ईएनसी बनने की रेस में वरिष्ठ मुख्य अभियंताओं में  मक्सी कुजूर ,एलेक्जेंडर ग्राहम ,अनिल खलको सिल्वेस्टर मिंज जैसे नाम चर्चा में हैं। लेकिन, इन सबके बीच जिस एक नाम ने सबको चौंका दिया है, वो है मक्सी कुजूर। जी हां, वही मक्सी कुजूर जिसे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रंगे हाथों घूस लेते दबोचा था। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या सिस्टम एक ऐसे दागी अधिकारी को पूरे विभाग का मुखिया बना देगा?

मक्सी कुजूर का इतिहास बड़ा ही दागदार और विवादों से भरा रहा है। जब ये छुईखदान जल संसाधन संभाग में कार्यपालन अभियंता (ईई) की कुर्सी पर बैठा था, तब इसने जमकर मलाई काटी। एक ठेकेदार से पुराने बिल पास करने के नाम पर इस अधिकारी ने 54 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। लेकिन इसकी यही लालच इसे ले डूबी। एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और मक्सी को रंगे हाथों धर दबोचा।

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इसके बाद इस घूसखोर अफसर को जेल की हवा खानी पड़ी। सलाखों के पीछे इसके कई दिन कटे। बाद में इसने खुद को बचाने के लिए कानूनी दांवपेच खेले और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां से अपील करके इसने किसी तरह अपने लिए सजा माफी का जुगाड़ कर लिया। कोर्ट से राहत भले ही मिल गई हो, लेकिन माथे पर लगा रिश्वतखोरी का वो कलंक आज तक धुला नहीं है। एसीबी की वो रेड और 54 हजार की गड्डी वाली कहानी विभाग का हर छोटा-बड़ा कर्मचारी जानता है।

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हैरानी की बात तो ये है कि जेल की रोटियां तोड़ चुके और ऐसे सड़े हुए सर्विस रिकॉर्ड वाले अफसर का नाम भी ईएनसी जैसे बड़े पद की रेस में शामिल कर लिया गया है। क्या एक ऐसा अधिकारी जिसने चंद रुपयों के लिए अपना ईमान बेच दिया था, वो अब पूरे सिंचाई विभाग का ठेका लेगा?

अब देखना ये है कि 30 जून को जब शंकर ठाकुर कुर्सी छोड़ेंगे, तो सरकार क्या फैसला लेती है। नियम कहते हैं कि पोस्टिंग वरिष्ठता, साफ-सुथरे सेवा रिकॉर्ड और प्रशासनिक जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए। तो क्या सरकार एक दागी और जेल जा चुके अफसर के हाथ में पूरे विभाग की चाबी सौंप देगी? या फिर किसी बेदाग छवि वाले इंजीनियर को मौका मिलेगा? अगर ऐसे दागी को ईएनसी का प्रभार मिलता है, तो ये सीधे-सीधे सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा होगा। पूरी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि इस बार सेटिंग का खेल चलेगा या दागी को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

 

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