'श्मशान तक भी सड़क नहीं'... बलौदा बाजार से सामने आई सिस्टम की हकीकत, ग्रामीणों में आक्रोश
बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से विकास के दावों पर सवाल खड़े कर देने वाली एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई है। करही बाजार चौकी क्षेत्र के ग्राम लालपुर में श्मशान घाट तक जाने का रास्ता कथित अतिक्रमण के कारण बंद होने से ग्रामीणों को एक प्रसूता महिला की अंतिम यात्रा खेतों के बीच से निकालनी पड़ी। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति भी उजागर करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से श्मशान तक जाने वाले मार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रसव के 12 दिन बाद हुई महिला की मौत
जानकारी के अनुसार, ग्राम लालपुर निवासी बृहस्पति यादव का प्रसव के करीब 12 दिन बाद, गुरुवार 6 अगस्त को निधन हो गया। परिजन जब अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर श्मशान घाट की ओर रवाना हुए, तब उन्हें पता चला कि वर्षों से उपयोग में आने वाला पारंपरिक रास्ता बंद हो चुका है। ऐसे में मजबूरी में ग्रामीणों को शव को कंधे पर उठाकर खेतों के बीच बने संकरे रास्तों से ले जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर ग्रामीण नदी किनारे स्थित श्मशान घाट पहुंचे, जहां अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार के समय भी नहीं मिली मूलभूत सुविधा
ग्रामीणों का कहना है कि किसी परिवार के लिए अंतिम संस्कार का समय पहले से ही बेहद पीड़ादायक होता है, लेकिन रास्ता न होने के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बरसात के मौसम में खेतों से होकर शव ले जाना और भी मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के बीच अंतिम यात्रा निकालना मजबूरी बन जाती है।
ग्रामीणों का आरोप- वर्षों से कर रहे हैं शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते पर लंबे समय से कथित अतिक्रमण है। इस संबंध में कई बार ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग और प्रशासन को लिखित शिकायतें और आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि हर बार किसी की मृत्यु होने पर गांव के लोगों को इसी कठिन रास्ते से अंतिम यात्रा निकालनी पड़ती है।
विकास के दावों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार गांव-गांव तक सड़क और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, तब आज भी श्मशान घाट तक जाने के लिए स्थायी रास्ता क्यों उपलब्ध नहीं है? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पानी और श्मशान तक पहुंच जैसे बुनियादी अधिकारों से किसी भी गांव को वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट तक जाने वाले पारंपरिक मार्ग को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और स्थायी सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार जैसे दुखद समय में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गांव के लोग अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस घटना के बाद उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा।
