बिलासपुर भाजपा दफ्तर में बवाल मेयर और पार्षदों में तीखी नोकझोंक एक दूसरे को बताया कांग्रेसी
बिलासपुर नगर निगम के बजट सत्र से पहले सत्ता पक्ष में ही बड़ी फूट सामने आ गई है। करबला रोड स्थित भाजपा कार्यालय में मेयर और पार्षदों के बीच जमकर विवाद हुआ। यह बैठक बजट और सामान्य सभा की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। लेकिन यह अहम बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। शहर की सफाई व्यवस्था और ठेका कंपनी को दिए गए फायदे पर पार्षद भड़क गए। बात इतनी ज्यादा बिगड़ी कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर कांग्रेस से जुड़े होने का गंभीर आरोप लगा दिया। यह पूरा विवाद अब शहर की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
पूरा मामला शहर की सफाई व्यवस्था और एक निजी ठेका कंपनी से जुड़ा है। बिलासपुर शहर में सफाई का जिम्मा लायन सर्विसेज कंपनी के पास है। भाजपा पार्षदों का ही आरोप है कि शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सड़क किनारे गंदगी का अंबार लगा रहता है। डिवाइडर और फुटपाथ की सफाई तक नहीं हो रही है। जमीनी स्तर पर सफाई का काम बिल्कुल जीरो है। इसके बावजूद ठेका कंपनी को भुगतान में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दे दी गई। इसी बात पर पार्षदों ने बैठक में मोर्चा खोल दिया।
पार्षदों का गुस्सा इस बात पर सबसे ज्यादा था कि ठेका कंपनी का भुगतान बढ़ाने का फैसला मनमाने तरीके से लिया गया है। नियम के मुताबिक ऐसे बड़े फैसलों के लिए मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी से मंजूरी लेनी जरूरी होती है। इसके बाद इसे सामान्य सभा में लाया जाता है। लेकिन पार्षदों का आरोप है कि इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। पार्षदों ने सीधा सवाल किया कि जब काम ही नहीं हो रहा है तो फिर कंपनी पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही है। इस सीधे सवाल का जवाब देने के बजाय बैठक में तीखी बहस शुरू हो गई।
ठेका कंपनी के मुद्दे पर हो रही यह बहस थोड़ी ही देर में व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गई। और इसने अचानक बड़ा राजनीतिक रंग ले लिया। पार्षदों के तीखे सवालों से घिरने के बाद मेयर ने एक पार्षद पर सीधा हमला बोल दिया। मेयर ने पार्षद से कहा कि तुम तो कांग्रेस से आए हो और हमेशा कांग्रेसियों के साथ ही उठते बैठते हो। तुम्हारा काम सिर्फ पार्टी का माहौल खराब करना है।
मेयर की इस चुभने वाली बात पर पार्षद भी भड़क गए। पार्षद ने बिना कोई देरी किए तुरंत पलटवार किया और मेयर को करारा जवाब दिया। पार्षद ने भरी बैठक में कह दिया कि आपका रिश्ता भी हमेशा से कांग्रेस के साथ ही रहा है। आप भी कांग्रेसी मानसिकता से ही काम कर रहे हैं। इस बयानबाजी के बाद बैठक का माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया और वरिष्ठ नेताओं को बीच बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा।
यह भारी हंगामा जिस बैठक में हुआ वह तेरह अप्रैल को होने वाले निगम के सम्मेलन की तैयारी के लिए रखी गई थी। नगर निगम का साधारण सम्मेलन और बजट सत्र शहर के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। करबला रोड दफ्तर में हुई इस रिहर्सल बैठक का मुख्य उद्देश्य यह था कि विपक्ष के कड़े सवालों का सामना कैसे किया जाए। सत्ता पक्ष के लोग विपक्ष को सदन में घेरने की रणनीति बनाने बैठे थे। लेकिन वे आपस में ही बुरी तरह उलझ गए।
अब इस आपसी विवाद से विपक्ष को बैठे बिठाए एक बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया है। भाजपा के अंदर मचे इस घमासान का सीधा असर आने वाले बजट सत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है। सत्ता पक्ष के पार्षद खुद अपनी ही परिषद के फैसलों के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए हैं। ऐसे में कांग्रेसी पार्षद सदन के अंदर सत्ता पक्ष को आसानी से घेर लेंगे। ठेका कंपनी को बिना मंजूरी फायदा पहुंचाने का यह मुद्दा अब सदन में भी जोर शोर से गूंजेगा।
विपक्ष पहले से ही शहर की खराब सड़कों और पीने के पानी की समस्या को लेकर सत्ता पक्ष पर हमलावर है। ऐसे में सफाई ठेके का यह नया विवाद आग में घी डालने का काम करेगा। कांग्रेस पार्षद दल ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष की गलत नीतियां अब उनके ही पार्षदों के जरिए सामने आ रही हैं। विपक्ष अब तेरह अप्रैल के सम्मेलन में इस मुद्दे पर मेयर से लिखित जवाब मांगने की पूरी तैयारी कर रहा है।
सत्ता पक्ष के लिए अब अपनी ही पार्टी के नाराज पार्षदों को मनाना और विपक्ष के हमलों का जवाब देना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के बीच बिलासपुर की आम जनता बुरी तरह पिस रही है। लोग रोजाना गंदगी और खराब सफाई व्यवस्था से परेशान हो रहे हैं। लेकिन निगम के जिम्मेदार लोग शहर को साफ करने के बजाय ठेकेदार के बिल और राजनीतिक आरोपों पर लड़ रहे हैं। शहर के लोग अब यह देख रहे हैं कि तेरह अप्रैल की बैठक में सफाई के मुद्दे पर कोई ठोस फैसला होता है या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी ही चलती है। भाजपा के बड़े नेताओं को जल्द ही डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आना होगा वरना पार्टी की छवि को और भारी नुकसान पहुंच सकता है।
