अब ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता, IRCTC ने QCI से मिलाया हाथ
नई दिल्ली : भारतीय रेलवे में सफर के दौरान यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) ने भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के साथ रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन से लेकर रेलवे स्टेशनों की खानपान इकाइयों तक की निगरानी के लिए स्वतंत्र, तकनीक आधारित ऑडिट व्यवस्था लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना और लापरवाही बरतने वाले कैटरिंग संचालकों की जवाबदेही तय करना है।
औचक निरीक्षण से पकड़ी जाएगी लापरवाही
इस व्यवस्था के तहत क्यूसीआई के प्रमाणित कुशल ट्रेनों की मोबाइल कैटरिंग इकाइयों और स्टेशनों की स्थिर खानपान इकाइयों का औचक निरीक्षण करेंगे। इसके लिए त्रैमासिक और अर्धवार्षिक ऑडिट चक्र अपनाए जाएंगे। निरीक्षण में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच की जाएगी। ऑडिट के दौरान भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, रसोई की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के रखरखाव और कर्मचारियों की साफ-सफाई सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे खानपान सेवाओं में खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी, 24 घंटे में रिपोर्ट
इस साझेदारी की सबसे अहम विशेषता इसका डिजिटल ऑडिट सिस्टम होगा। निरीक्षक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जांच करेंगे, जिसमें लोकेशन की जियो-टैगिंग, समय का रिकॉर्ड और तस्वीरों के रूप में साक्ष्य दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिपोर्ट में दर्ज कमियों की पुष्टि करना आसान होगा। ऑडिट रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद सामने आई खामियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई (सीएपीए) की निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था से संबंधित वेंडरों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई और सुधार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
भोजन की गुणवत्ता से लेकर कर्मचारियों की स्वच्छता तक होगी जांच
नई व्यवस्था में केवल खाने की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि भोजन तैयार करने और परोसने से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। इसके तहत प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं पर जांच होगी:-
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रसोई और खाद्य सामग्री की स्वच्छता: भोजन तैयार करने की जगह और उपकरणों की साफ-सफाई की जांच।
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खाद्य पदार्थों का सुरक्षित भंडारण: शाकाहारी और मांसाहारी कच्ची सामग्री को अलग रखना तथा निर्धारित तापमान पर खाद्य पदार्थों का भंडारण।
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कीट नियंत्रण: खानपान इकाइयों में कीट नियंत्रण की व्यवस्था और उसके रिकॉर्ड का सत्यापन।
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कर्मचारियों की फिटनेस और साफ-सफाई: मेडिकल फिटनेस, आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरणों और व्यक्तिगत स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन।
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वेंडरों की जवाबदेही: निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई की निगरानी और निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई।
भविष्य में यात्री संतुष्टि सर्वे और प्रशिक्षण पर भी जोर
आईआरसीटीसी और क्यूसीआई की यह साझेदारी केवल खाद्य सुरक्षा ऑडिट तक सीमित नहीं रहेगी। इसके माध्यम से भविष्य में यात्री संतुष्टि सर्वेक्षण, खानपान से जुड़े बुनियादी ढांचे का ऑडिट और कर्मचारियों के विशेष प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। समझौते के दौरान प्रतिनिधियों ने स्वच्छ सर्वेक्षण और एफएसएसएआई के लिए देशव्यापी दूध एवं खाद्य निगरानी जैसे बड़े कार्यक्रमों में क्यूसीआई के अनुभव का उल्लेख किया। इसी अनुभव के आधार पर रेलवे की खानपान सेवाओं की निगरानी को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इन अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता
समझौता ज्ञापन पर आईआरसीटीसी के महाप्रबंधक (गुणवत्ता एवं परियोजनाएं) सुधीर वारियर और भारतीय गुणवत्ता परिषद के प्रधान सलाहकार एवं प्रमुख-पीपीआईडी सुब्रतो घोष ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एनएबीएल के सीईओ रामानन्द नागेंद्र शुक्ला, भारतीय गुणवत्ता परिषद के सहायक महासचिव मोहित पाढ़ी, आईआरसीटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राहुल हिमालयन और निदेशक (कैटरिंग सेवाएं) मनोज कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे।
यात्रियों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम
रेलवे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं और उनमें से लाखों लोग यात्रा के दौरान खानपान सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर प्रभावी निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। आईआरसीटीसी और क्यूसीआई की यह साझेदारी निरीक्षण व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने, खामियों की समय पर पहचान करने और कैटरिंग संचालकों की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है।
हालांकि, इस पहल का वास्तविक असर इसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमों के लगातार पालन पर निर्भर करेगा। यदि डिजिटल ऑडिट, औचक निरीक्षण और सुधारात्मक कार्रवाई को सख्ती से लागू किया जाता है, तो रेलवे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद खानपान सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
