शिक्षक पिता की दलील पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बेहतर स्कूल और आर्थिक हैसियत कस्टडी का आधार नहीं

शिक्षक पिता की दलील पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बेहतर स्कूल और आर्थिक हैसियत कस्टडी का आधार नहीं

बिलासपुर : बच्चे की जिंदगी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, जहां बेहतर स्कूल, ज्यादा पैसा या ऊंची आर्थिक हैसियत के दम पर माता-पिता में से कोई उसकी कस्टडी हासिल कर ले। बच्चे के भविष्य का फैसला करते समय सबसे अहम उसकी खुशी, सुरक्षा और परवरिश है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी से जुड़े एक मामले में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल शिक्षक होना और बच्चे को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने की क्षमता रखना उसकी कस्टडी पाने का पर्याप्त आधार नहीं है। जब मां बच्चे की देखभाल और पढ़ाई ठीक से कर रही है, तो उसे उसके मौजूदा माहौल से हटाना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने पिता की अपील खारिज कर दी।

नहीं जताई पिता के साथ जाने की इच्छा

मामला बलौदाबाजार जिले का है। यहां रहने वाले शिक्षक पति और पत्नी के बीच विवाद के बाद तलाक हो गया था। इसके बाद बेटा मां के साथ रहने लगा। पिता ने दूसरी शादी कर ली और कुछ समय बाद सात वर्षीय बेटे की कस्टडी पाने के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फैमिली कोर्ट में सुनवाई के दौरान बच्चे का व्यवहार भी अहम रहा। सात साल के बेटे ने पिता की ओर देखा तक नहीं और उनके साथ जाने की इच्छा भी जाहिर नहीं की। बच्चे की स्थिति और मामले के तथ्यों को देखते हुए फैमिली कोर्ट ने पिता को कस्टडी देने से इनकार कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए पिता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

Read More छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मिलेंगे छह नए न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दी मंजूरी

शिक्षक होने और संयुक्त परिवार का दिया हवाला

Read More छत्तीसगढ़ के हजारों NHM संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत की उम्मीद, मेडिकल लीव से वेतन वृद्धि तक कई मांगों पर बनी सहमति

पिता की ओर से दलील दी गई कि वे शिक्षक हैं और संयुक्त परिवार में रहते हैं। परिवार के दूसरे सदस्य भी बच्चे की देखभाल कर सकते हैं। वे बेटे को अंग्रेजी माध्यम के अच्छे स्कूल में पढ़ाकर बेहतर भविष्य देना चाहते हैं। इसके उलट मां ने अदालत को बताया कि बेटे की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं है। मां ने यह भी आरोप लगाया कि बेटे के जन्म के बाद से पिता ने उसकी सुध नहीं ली। न तो उसे देखने आए और न ही अपने साथ रखने की कोशिश की। भरण-पोषण की राशि भी नहीं दे रहे हैं। मां ने आशंका जताई कि भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए अब कस्टडी की मांग की जा रही है।

फीस की रसीदों ने कमजोर की पिता की दलील

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि मां ने बच्चे की पढ़ाई से संबंधित स्कूल फीस की रसीदें पेश की हैं। बच्चा दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है और उसकी शिक्षा अच्छे स्कूल में जारी है। ऐसे में पिता की यह दलील पर्याप्त नहीं मानी जा सकती कि बेहतर शिक्षा देने के लिए बच्चे की कस्टडी उन्हें सौंप दी जाए। सुनवाई के दौरान पिता ने क्रॉस एग्जामिनेशन में अपनी दूसरी शादी की बात भी स्वीकार की थी। अदालत ने पूरे मामले के तथ्यों और बच्चे की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए कस्टडी बदलने का कोई उचित आधार नहीं पाया।

माता-पिता के अधिकार से ऊपर बच्चे का हित

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में साफ किया कि कस्टडी के मामलों में माता-पिता के अधिकारों से अधिक महत्वपूर्ण बच्चे का कल्याण है। केवल आर्थिक मजबूती, पेशे या बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की क्षमता के आधार पर बच्चे को एक अभिभावक से दूसरे के पास नहीं भेजा जा सकता। अदालत को यह देखना होता है कि बच्चे के लिए कौन-सा वातावरण अधिक सुरक्षित, स्थिर और हितकारी है।

बेटे से मिलने का अधिकार रखा बरकरार

हाईकोर्ट ने पिता की कस्टडी की मांग भले ही खारिज कर दी, लेकिन बेटे से मिलने का अधिकार बरकरार रखा। पिता त्योहारों, बेटे के जन्मदिन और स्कूल की लंबी छुट्टियों के दौरान उससे मिल सकेंगे। इसके लिए उन्हें पहले मां को सूचना देकर मुलाकात के समय और स्थान पर सहमति लेनी होगी। मुलाकात सार्वजनिक स्थान पर होगी। अदालत ने मां से भी कहा कि बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए पिता के मुलाकात संबंधी अनुरोध पर सकारात्मक रुख अपनाएं। हालांकि, कोर्ट ने मुलाकात के लिए कोई निश्चित दिन या समय निर्धारित नहीं किया।

कानून में भी बच्चे का कल्याण सर्वोपरि

बच्चों की कस्टडी के मामलों में गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 की धारा 17 के तहत बच्चे की उम्र, परिस्थितियों, शिक्षा और कल्याण को ध्यान में रखा जाता है। वहीं हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 13 भी बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानती है।

सुप्रीम कोर्ट भी नील रतन कुंडू विरुद्ध अभिजीत कुंडू मामले में स्पष्ट कर चुका है कि बच्चे का हित माता-पिता के कानूनी अधिकारों से ऊपर है। हाईकोर्ट का यह फैसला भी इसी कानूनी सिद्धांत को रेखांकित करता है कि बच्चे की कस्टडी किसी की आर्थिक या सामाजिक हैसियत का सवाल नहीं, बल्कि उसके बेहतर भविष्य और भावनात्मक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। 

Tags:

Latest News

 गंदगी के बीच तैयार हो रहे थे  बताशे , बूंदी में मिला अखाद्य केमिकल रंग, 132 किलो मिठाई नष्ट गंदगी के बीच तैयार हो रहे थे बताशे , बूंदी में मिला अखाद्य केमिकल रंग, 132 किलो मिठाई नष्ट
महादेव ऐप केस: ओमान से लाया गया मुख्य आरोपी CBI रिमांड पर; भाजपा नेता ने कहा- अब प्रोटेक्शन मनी लेने वाले अफसरों पर हो एक्शन
पीडब्ल्यूडी में नई भर्तियों पर सरकार का बड़ा ब्रेक, नियम तोड़े तो अफसरों की जेब से होगी वसूली
रायपुर में 4 करोड़ की रंगदारी का आरोप, अनवर ढेबर समेत 6 पर FIR; 38 दिन बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
शिक्षक पिता की दलील पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बेहतर स्कूल और आर्थिक हैसियत कस्टडी का आधार नहीं
ट्रंप की सत्ता को लगा बड़ा झटका, अब हर फैसले पर होगी विपक्ष की नजर! भारत की बढ़ेंगी मुश्किलें या मिलेगा फायदा?
बीजापुर में मुर्गा बाजार की आड़ में चल रहा था लाखों का जुआ, पुलिस की बड़ी कार्रवाई; 156 लोग पकड़े गए, 47 वाहन जब्त
जगत पहल विशेष ...हसदेव में फर्जी ग्रामसभा से कटे जंगल, तमनार में बवाल और बंगवार में गई मजदूरों की जान; फिर भी इन 5 खदानों को मिला 5-स्टार अवार्ड
बिलासपुर में श्मशान घाट पर तंत्र-मंत्र के शक में युवक की बेरहमी से पिटाई, तीन आरोपियों पर पुलिस ने की कार्रवाई
4 बार ढहा एनीकट, दस्तावेजों में हेराफेरी कर आरोपी को मिला प्रमोशन: मुख्य अभियंता सिद्दीकी को हटाए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं, CBI को केस सौंपने की मांग
ऐसे छोटे मोटे हादसे होते रहते हैं... जो उखाड़ना है उखाड़ लो: बिना सुरक्षा उपकरण काम कर रहे ऑपरेटर की करंट से मौत, अफसरों का ग्रामीणों से विवाद; सदमे में मृतक के भाई को हार्ट अटैक
रायपुर में शिक्षा मंत्री के बंगले में डीएड अभ्यर्थियों का हल्लाबोल, 2300 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति पर अड़े प्रदर्शनकारी