4 बार ढहा एनीकट, दस्तावेजों में हेराफेरी कर आरोपी को मिला प्रमोशन: मुख्य अभियंता सिद्दीकी को हटाए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं, CBI को केस सौंपने की मांग
चांटापारा एनीकट घोटाला • 1.4 मीटर की जगह 0.35 मीटर का बना फ्लोर, 4 बार ढहा स्ट्रक्चर
बिलासपुर/कोटा । जल संसाधन विभाग के बहुचर्चित चांटापारा-टू एनीकट कम काजवे निर्माण घोटाले (अपराध क्र. 15/2018) में दस्तावेजों को छिपाने, मिथ्या जानकारी देने और पदोन्नति के लिए तथ्य छिपाने का बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2015 से 2020 के बीच चार बार क्षतिग्रस्त हुए इस प्रोजेक्ट में 1.4 मीटर गहरे फ्लोर की जगह महज 0.35 मीटर का निर्माण किया गया था। मामले के मुख्य आरोपी आई.ए. सिद्दीकी वर्तमान में मुख्य अभियंता के प्रभार पर कार्यरत हैं। शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि मुख्य अभियंता सिद्दीकी को उनके पद से हटाए बिना इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी भी स्तर पर संभव नहीं है। आरोपी अधिकारी उन अधिकारियों से वरिष्ठ हैं, जिन्हें अभिलेख देने हैं या गवाही देनी है। ऐसे में राज्य एजेंसी पर भरोसा जताने के बजाय इस पूरे मामले की जांच दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 5 एवं 6 के तहत तत्काल केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए।
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में सीबीआई की सामान्य सहमति बहाल कर दी है और कई प्रकरण जांच एजेंसी को सौंपे जा चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने 'पश्चिम बंगाल राज्य विरुद्ध लोकतांत्रिक अधिकार संरक्षण समिति' प्रकरण में स्पष्ट किया है कि जहां राज्य की जांच पर विश्वास न रहे, वहां संवैधानिक न्यायालय सीबीआई जांच का आदेश दे सकते हैं। शिकायतकर्ता ने अल्टीमेटम दिया है कि शासन ने विशिष्ट सहमति अधिसूचना जारी कर प्रकरण सीबीआई को नहीं सौंपा, तो अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
बिना दस्तावेजों के एसीबी ने पेश किया खात्मा, एक महीने बाद प्रमोशन
जांच को प्रभावित करने के लिए विभाग ने मुख्य आरोपी सिद्दीकी की उसी कार्यालय (कोटा) में बतौर कार्यपालन अभियंता पदस्थापना कर दी, जहां ठेकेदार के बिल और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे। दस्तावेजों को आरोपी के कब्जे में रखने का सीधा असर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच पर पड़ा। एसीबी ने 25 जनवरी 2019 को 19 बिंदुओं पर जानकारी मांगी और लगातार 6 रिमाइंडर भेजे, लेकिन विभाग ने मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बावजूद जांच एजेंसी ने सीआरपीसी की धारा 91 का उपयोग कर दस्तावेज जब्त करने के बजाय, 26 मई 2023 को बिना मूल अभिलेखों के ही न्यायालय में क्लोजर (खात्मा) रिपोर्ट पेश कर दी।
खात्मा रिपोर्ट पेश होने के ठीक एक महीने बाद 28 जून 2023 को मुख्य आरोपी सिद्दीकी को पदोन्नत कर दिया गया। विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के 'के.वी. जानकीरमन प्रकरण' में दिए गए सीलबंद लिफाफा नियम की स्पष्ट अनदेखी की। शासन ने 2 फरवरी 2021 को 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, लेकिन 30 सितंबर 2022 से 3 जनवरी 2025 तक कोटा संभाग के कार्यपालन अभियंता पद पर सिद्दीकी ही काबिज रहे, जिसके कारण जवाब शासन तक कभी पहुंचा ही नहीं।
विधानसभा में दी गलत जानकारी
आरोपी को बचाने के लिए विभाग ने विधानसभा सत्र में असत्य जानकारी प्रस्तुत की। दूसरी ओर, प्रधान महालेखाकार (एजी) को कई वर्षों के स्मरण पत्रों के बाद दिए गए जवाब में विभाग ने स्वीकार किया कि एनीकट क्षतिग्रस्त हुआ है। शिकायतकर्ता ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर गलत उत्तर देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और एजी से विशेष लेखा परीक्षा की मांग की है।
'काजवे' शब्द उड़ाकर लाखों का गोलमाल
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 17 सितंबर 2009 को हुई थी। तब प्रशासकीय स्वीकृति 'चांटापारा-टू एनीकट कम काजवे' के नाम से जारी की गई थी। लेकिन बाद में तकनीकी स्वीकृति के दौरान दस्तावेजों में हेराफेरी की गई और 'काजवे' शब्द हटा दिया गया। मौके पर सिर्फ एनीकट बनाया गया और काजवे के नाम पर जारी लाखों रुपए का सीधे गोलमाल कर दिया गया।
आदेशों में विरोधाभास: छोटे अफसरों पर गिरी गाज
इस प्रकरण में विभाग के आदेश लगातार बदलते रहे। 25 फरवरी 2019 को शासन ने आदेश जारी कर कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति नहीं हुई है। लेकिन इसी आदेश में लापरवाही मानते हुए दो जूनियर अफसरों (जी.के. फतनानी और कमलेश्वर सिंह) की एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई। सवाल उठा कि जब वित्तीय क्षति नहीं हुई, तो सजा क्यों दी गई और नामजद आरोपी सिद्दीकी को क्यों छोड़ दिया गया? बाद में 15 जनवरी 2021 को शासन ने खुद माना कि निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है।
शिकायतकर्ता ने दागी अधिकारी की पदोन्नति निरस्त कर तत्काल प्रभाव से निलंबन की मांग की है। मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा इस मामले में सीबीआई जांच के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), भारत सरकार को पत्र लिखे जाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
