कोरिया में 12 दिनों से हाथियों का डेरा, धान की फसल बर्बाद; रातभर पहरा दे रहे किसान
कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत वन परिक्षेत्र में चार हाथियों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 12 दिनों से विचरण कर रहे हाथियों के दल ने लोलकी और जोगिया क्षेत्र में किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में तैयार हो रही फसल बर्बाद होने से किसान परेशान हैं, वहीं हाथियों के गांवों के करीब पहुंचने की आशंका के चलते ग्रामीण रातभर जागकर निगरानी करने को मजबूर हैं।
कछाड़ी बीट और जोगिया जंगल में हाथियों की आवाजाही
वन विभाग के अनुसार, चार हाथियों का दल सोनहत वन परिक्षेत्र की कछाड़ी बीट और आसपास के जंगलों में विचरण कर रहा है। जोगिया जंगल में भी हाथियों की मौजूदगी बताई गई है। इसके चलते आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
लोलकी और जोगिया में धान की फसल को नुकसान
हाथियों के दल ने लोलकी क्षेत्र में किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। जोगिया इलाके में भी खेतों में खड़ी फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। महीनों की मेहनत के बाद तैयार हुई फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों के सामने आर्थिक संकट की चिंता खड़ी हो गई है। प्रभावित किसानों को आशंका है कि यदि हाथियों की आवाजाही इसी तरह जारी रही, तो फसलों को और नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित खेतों का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
हाथियों के डर से रातभर जाग रहे ग्रामीण
हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण रात में खेतों और घरों के आसपास सतर्क रहते हैं, ताकि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सके। हालांकि, हाथियों को खुद भगाने या उनके नजदीक जाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।
वन विभाग की निगरानी जारी
वन अमला हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने, उन्हें घेरने या उकसाने से बचने और उनकी मौजूदगी की सूचना वन विभाग को देने की जरूरत है। फिलहाल, किसानों को फसल नुकसान के आकलन और मुआवजे का इंतजार है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग निगरानी के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में समय पर सूचना और सुरक्षा संबंधी मदद सुनिश्चित करे, ताकि फसलों को होने वाले नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष के खतरे को कम किया जा सके।
