Chhattisgarh News: नशा तस्करों पर शिकंजा कसने की तैयारी, जगदलपुर में खुलेगी विशेष अदालत; फास्ट ट्रैक सुनवाई पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशा तस्करी के मामलों में जल्द सुनवाई और दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। जगदलपुर में जल्द ही मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत खोली जाएगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य शहरों में भी ऐसी अदालतें शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही राज्य स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, नशे के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तस्करों की गिरफ्तारी से लेकर न्यायालय में सजा दिलाने तक हर स्तर पर निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
रायपुर में 7 करोड़ के मादक पदार्थ जब्त
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 208 मामले दर्ज किए गए और 369 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 7 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए गए। इसके अलावा SAFEMA के तहत चार तस्करों की करीब 9 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 1,314 किलोग्राम गांजा, 33 हजार नशीली टैबलेट, 187 ग्राम एमडीएमए, 167 ग्राम हेरोइन, 151 ग्राम अफीम और 5 ग्राम कोकीन जब्त की। इसके अलावा नशीले सिरप की 472 बोतलें और 550 प्रतिबंधित इंजेक्शन भी बरामद किए गए। ये आंकड़े रायपुर जिले में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की व्यापकता को दर्शाते हैं।
नौ महीने में 299 तस्करों को सुनाई गई सजा
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नारकोटिक्स से जुड़े विशेष न्यायालयों ने इस साल नौ महीनों में 188 मामलों में 299 आरोपियों को सजा सुनाई। इनमें 101 मामलों में 138 तस्करों को 10 साल से कम की सजा मिली, जबकि 37 मामलों में 60 आरोपियों को 10 साल तक की सजा सुनाई गई। वहीं, 50 मामलों में 101 तस्करों को 10 साल से अधिक की सजा हुई।
तुलना करें तो वर्ष 2025 में 12 महीनों के दौरान 197 मामलों में 336 तस्करों को सजा सुनाई गई थी। इनमें 34 मामलों में 82 आरोपियों को 10 साल से अधिक की सजा मिली थी। इन आंकड़ों के आधार पर लंबी अवधि की सजा वाले मामलों में प्रभावी अभियोजन और मजबूत साक्ष्य जुटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हर सुनवाई की निगरानी के लिए अलग टीम
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने अदालतों में लंबित मादक पदार्थ तस्करी के मामलों की नियमित निगरानी के लिए अलग टीम बनाई है। इसमें टीआई रैंक के एक अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह अधिकारी मामलों की रोजाना समीक्षा करता है और सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहकर प्रक्रिया पर नजर रखता है।
टीम का काम गवाहों से संपर्क बनाए रखना, केस डायरी को अपडेट कराना और जांच या अभियोजन के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करने में समन्वय करना है। पुलिस के अनुसार, नियमित निगरानी से अदालतों में मामलों की पैरवी मजबूत करने और आरोपियों को सजा दिलाने में मदद मिल रही है। जिन अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मामलों में सजा होती है, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए इनाम भी दिया जाता है।
विशेष अदालतों और टास्क फोर्स से तेज होगी कार्रवाई?
प्रदेश में विशेष अदालतों का विस्तार और राज्य स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हो सकते हैं। जगदलपुर में प्रस्तावित अदालत के बाद अन्य शहरों में भी सुनवाई की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाना और जांच से लेकर अभियोजन तक बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
