रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए शिक्षा विभाग के बाबू पर गिरी गाज, कोर्ट की 3 साल की सजा के बाद नौकरी से बर्खास्त
बलरामपुर। रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी गौतम सिंह आयम पर अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। भ्रष्टाचार के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने और 3 साल के कठोर कारावास की सजा मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। गौतम सिंह आयम को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 13 अगस्त 2024 को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। करीब दो साल बाद अब न्यायालय के फैसले के आधार पर विभाग ने उनकी सेवा समाप्त कर दी है।
एरियर्स भुगतान के नाम पर मांगे थे 20 हजार
मामला विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय वाड्रफनगर से जुड़ा है। गौतम सिंह आयम वहां सहायक ग्रेड-2 के तौर पर संलग्न थे, जबकि उनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंजानी में थी। न्यायालय के फैसले के अनुसार, कर्मचारी ने प्रार्थी नितेश रंजन पटेल से एरियर्स भुगतान से संबंधित काम के लिए कथित तौर पर 20 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में 12 हजार रुपये की राशि लेते समय ACB ने उन्हें पकड़ लिया।
ACB की कार्रवाई के बाद जेल भेजे गए थे
13 अगस्त 2024 को ACB रायपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए गौतम सिंह आयम को कथित रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल रामानुजगंज भेज दिया गया। चूंकि वह 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहे, इसलिए नियमानुसार उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया गया था।
कोर्ट ने माना- भ्रष्टाचार का अपराध किया
मामले में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, बलरामपुर-रामानुजगंज के न्यायालय ने 15 मई 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर गौतम सिंह आयम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत दोषी माना। कोर्ट ने उन्हें 3 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन
न्यायालय के फैसले की प्रमाणित प्रति शिक्षा विभाग को प्राप्त होने के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और न्यायालय के फैसले के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने गौतम सिंह आयम की शासकीय सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई के साथ अब भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए गए कर्मचारी की सरकारी नौकरी भी चली गई है।
दो साल बाद हुई सेवा समाप्ति की कार्रवाई
ACB की कार्रवाई के बाद कर्मचारी को निलंबित किया गया था। इसके बाद मामला न्यायालय में चला और मई 2026 में अदालत ने दोषसिद्धि के साथ सजा सुनाई। अब न्यायालय के फैसले के आधार पर शिक्षा विभाग ने सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी की है। यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ जांच एजेंसियों और विभागीय कार्रवाई की अहम भूमिका को सामने लाता है। रिश्वत के आरोप में गिरफ्तारी से लेकर अदालत की सजा और अब सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी तक गौतम सिंह आयम के मामले में करीब दो साल के भीतर कार्रवाई की पूरी कड़ी सामने आई है।
