1636 करोड़ का देउरगांव-मटनार बैराज: चहेती कंपनी को ठेका दिलाने बदली गई टेंडर की शर्त, डूब जाएंगे 100 करोड़ के पुराने एनीकट
जगदलपुर। देउरगांव-मटनार बैराज निर्माण के लिए जारी 1636.60 करोड़ रुपये का टेंडर विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निविदा की शर्तों में मनमाफिक बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही, जिस स्थान पर यह नया बैराज बन रहा है, उसके जलभराव क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर पूर्व में बने करीब 100 करोड़ रुपये के पुराने एनीकट डूबकर बर्बाद हो जाएंगे।
अनुभव की शर्त में ऐसे हुआ बदलाव
टेंडर के स्वीकृत दस्तावेज की कंडिका 4.1(बी)(i) में मूल रूप से यह शर्त रखी गई थी कि ठेकेदार कंपनी के पास पिछले पांच साल में से 'किसी एक वर्ष' में तय मात्रा का काम करने का अनुभव होना चाहिए। लेकिन विभागीय स्तर पर इसे बदलकर पांच सालों का 'कुल अनुभव' कर दिया गया। जारी किए गए तीन टेंडरों में से केवल इसी एक निविदा में यह बदलाव देखने को मिला।
विभागीय जानकारी के अनुसार, मटनार के कार्यपालन अभियंता वेद प्रकाश पांडेय, अधीक्षण अभियंता नरेंद्र कुमार पांडेय और मुख्य अभियंता एलेक्जेंडर ग्राहम ने यह बदलाव किया, ताकि M/s NCC लिमिटेड इस टेंडर को हासिल कर सके। यह कंपनी एक साल के अनुभव वाली शर्त पूरी नहीं कर पा रही थी, लेकिन पांच साल का अनुभव जोड़ने पर वह पात्र हो गई। अंततः ठेका इसी कंपनी को मिला। जगदलपुर टीडीपीपी संभाग में भी एलेक्जेंडर ग्राहम मुख्य अभियंता हैं और वहां भी इन अधिकारियों के काम करने का तरीका इसी प्रकार का रहा है।
मंत्रालय में पकड़ी गई गड़बड़ी, फिर बाईपास कर पास कराई फाइल
मुख्य सचिव की कार्यकारिणी मीटिंग से स्वीकृत होने के बाद जब संबंधित कार्यपालन अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के माध्यम से निविदा दस्तावेज मंत्रालय पहुंचा, तो वहां पदस्थ कार्यपालन अभियंता शिवराम सिंघारे ने गड़बड़ी पकड़ ली। उन्होंने नोटशीट में देखा कि 'Any one year' शब्द हटा दिया गया है। सिंघारे ने आपत्ति दर्ज करते हुए ऑनलाइन ई-फाइल ओएसडी मक्सी कुजूर के पास भेज दी।
कुजूर ने यह फाइल सचिव के सामने रखी। बताया जा रहा है कि दस्तावेजों को देखकर सचिव ने नाराजगी जताई और कुजूर को फटकार लगाते हुए मूल शब्द वापस जोड़कर अप्रूवल लेने को कहा। इसके बाद मंत्रालय में एक नई प्रक्रिया अपनाई गई। एक नई नोटशीट और नई ई-फाइल बनाई गई। आपत्ति दर्ज करने वाले अधिकारी सिंघारे को बाईपास करते हुए, फाइल मक्सी कुजूर की आईडी से सचिव के पास भेजी गई। वहां से फाइल मुख्यमंत्री (जो विभागीय मंत्री भी हैं) के पास गई और अनुमोदन लेकर टेंडर लगा दिया गया।
पुराने निर्माण कार्यों पर फिर जाएगा पानी
इस नए बैराज के निर्माण से होने वाले नुकसान की बात भी सामने आई है। देउरगांव में जहां जलभराव होगा, उसके दायरे में इंद्रावती नदी पर पहले से बने कई एनीकट आ रहे हैं। इनमें तोकापाल एनीकट, कोहकापाल एनीकट, भालूगुड़ा एनीकट, जगदलपुर शहर का एनीकट और पांच अन्य योजनाएं शामिल हैं। इन पुराने निर्माण कार्यों पर शासन के 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। नए बैराज के बनने से ये सभी पुराने स्ट्रक्चर पूरी तरह डूब जाएंगे और इनकी उपयोगिता शून्य हो जाएगी।
