मां बम्लेश्वरी धाम में बैगा पूजा को लेकर फिर भड़का विवाद, किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज में उबाल

मां बम्लेश्वरी धाम में बैगा पूजा को लेकर फिर भड़का विवाद, किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज में उबाल

डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी धाम में एक बार फिर धार्मिक परंपरा और अधिकारों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बैगा पद्धति से पूजा और कथित पशु बलि के आरोप के बाद राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी ने आदिवासी गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट के बीच वर्षों पुराने टकराव को फिर सामने ला दिया है। 19 मई को ऊपरी पहाड़ी स्थित पुराने रोपवे क्षेत्र के पास चट्टान स्वरूप ‘गढ़ माता’ की पूजा किए जाने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि मां बम्लेश्वरी धाम में केवल सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की अनुमति है और किसी भी प्रकार की बलि प्रथा स्वीकार्य नहीं है। ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कथित घटना से करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद डोंगरगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में आदिवासी संगठनों का आक्रोश तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।WhatsApp-Image-2026-05-24-at-2.01.33-PM

गोंड और आदिवासी समाज का दावा है कि मां बम्लेश्वरी धाम से बैगा परंपरा और लोक आस्था का संबंध सदियों पुराना रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि पहाड़ी शक्तिपीठों में पारंपरिक लोक रीति से पूजा होती रही है, लेकिन अब इन परंपराओं को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट में स्थानीय गोंड समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा और उनकी सांस्कृतिक पहचान को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे पहले भी गर्भगृह प्रवेश, पंचमी भेंट और पारंपरिक पूजा अधिकारों को लेकर कई बार विवाद और आंदोलन सामने आ चुके हैं।WhatsApp-Image-2026-05-24-at-2.01.33-PM-1

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किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की लड़ाई का रूप लेता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है। डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल पर भी असर डाल सकता है।

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