अनुकंपा नौकरी पर छिड़ा विवाद, हाई कोर्ट ने मां के दावे को दी प्राथमिकता
बिलासपुर : ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की मौत के बाद परिवार में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाद हाई कोर्ट पहुंच गया है। मृतक हेड कांस्टेबल की पत्नी और नाबालिग बेटे ने नौकरी के लिए आवेदन किया है, वहीं मृतक की मां ने भी खुद को आश्रित बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है। मां को आशंका थी कि उनकी आपत्ति पर विचार किए बिना ही बहू या पोते के आवेदन पर फैसला हो सकता है। मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति पर निर्णय लेने से पहले मां की आपत्ति पर विचार करना होगा। साथ ही सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने और उसके बाद कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं।
ड्यूटी के दौरान हुई थी हेड कांस्टेबल की मौत
धमतरी निवासी तारा बाई मोहबे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में अपनी आपत्ति पर विचार किए जाने की मांग की है। उनके बेटे नटवर मोहबे पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। 27 जून 2026 को ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी उमा और नाबालिग बेटे चांद दीप ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
मां का दावा, अधिकारी के सामने रखी आपत्ति
तारा बाई का कहना है कि वह मृतक पुलिसकर्मी की आश्रित मां हैं। उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय, लालबाग, जगदलपुर के कमांडेंट के समक्ष अपना दावा और आपत्ति पहले ही प्रस्तुत कर दी है। इसके बावजूद उन्हें आशंका थी कि बहू और पोते के आवेदन पर विचार करते समय उनकी बात को नजरअंदाज किया जा सकता है। इसी आशंका को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि नियुक्ति पर कोई भी निर्णय लेने से पहले उनकी आपत्ति का निराकरण करने की मांग की।
आपत्ति पर विचार के बाद ही होगा फैसला: राज्य
मामले की सुनवाई जस्टिस बी डी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे लॉ अफसर ने कोर्ट को बताया कि तारा बाई अपनी आपत्ति सक्षम अधिकारी के समक्ष पहले ही प्रस्तुत कर चुकी हैं। अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन आने पर अधिकारी नियमानुसार उनकी आपत्ति पर विचार करने के बाद ही निर्णय लेगा।
सभी पक्षों को सुनकर जारी करें आदेश: हाई कोर्ट
राज्य सरकार के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि मृतक की पत्नी या बेटे की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया जाता है, तो सक्षम अधिकारी सबसे पहले तारा बाई मोहबे की ओर से प्रस्तुत आपत्ति पर विचार करेगा। इसके बाद सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकारी को कारण सहित उचित आदेश पारित करना होगा। कोर्ट के इस निर्देश से स्पष्ट है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामले में परिवार के किसी सदस्य की ओर से दर्ज आपत्ति को नजरअंदाज कर एकतरफा निर्णय नहीं लिया जा सकता। हालांकि, हाई कोर्ट ने किसी पक्ष को नियुक्ति का हकदार घोषित नहीं किया है, बल्कि मामले में नियमानुसार सुनवाई और निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
