Chhattisgarh Teachers Protest: शिक्षकों ने खोला TET के खिलाफ मोर्चा! बोले- अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मिले प्रमोशन, 18 अगस्त को सरकार को देंगे ज्ञापन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पदोन्नति में TET की अनिवार्यता हटाने समेत कई मांगों को लेकर प्रदेश के अलग-अलग शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर ‘छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा’ का गठन किया है। मोर्चे ने अब अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की पदोन्नति में TET को अनिवार्य करने से उनकी वरिष्ठता और सेवा अनुभव प्रभावित हो सकता है। इसी को लेकर मोर्चा वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहा है।
18 अगस्त को शिक्षा मंत्री और अधिकारियों को सौंपेंगे ज्ञापन
शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से 18 अगस्त को शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और DPI को ज्ञापन सौंपने का फैसला लिया गया है। ज्ञापन में पदोन्नति प्रक्रिया में TET की अनिवार्यता हटाने के साथ-साथ शिक्षकों की दूसरी लंबित मांगों को भी शामिल किया जाएगा। संगठनों का कहना है कि सरकार के सामने पूरे मामले को तथ्य और नियमों के आधार पर रखा जाएगा।
‘TET से ज्यादा अनुभव और वरिष्ठता को मिले महत्व’
मोर्चे का तर्क है कि लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए पदोन्नति में उनके अनुभव और वरिष्ठता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि पदोन्नति के लिए TET की शर्त लागू की जाती है, तो कई अनुभवी शिक्षक इसके कारण प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए मौजूदा पदोन्नति व्यवस्था की समीक्षा कर वरिष्ठता आधारित प्रमोशन का रास्ता अपनाने की मांग की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की छूट का भी दिया हवाला
शिक्षक संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी 2028 तक की छूट का हवाला दिया है। मोर्चे का कहना है कि इस अवधि को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति प्रक्रिया में TET की अनिवार्यता को लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इस कानूनी पहलू और इसके लागू होने की वास्तविक स्थिति पर अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और न्यायिक आदेशों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
सिर्फ TET नहीं, इन मुद्दों पर भी सरकार से जवाब की मांग
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपने आंदोलन को केवल TET की शर्त तक सीमित नहीं रखा है। संगठन की ओर से कई अन्य लंबित मांगों को भी सामने रखा गया है।
इनमें प्रमुख रूप से
- वेतन विसंगति दूर करने
- पुरानी सेवा अवधि की गणना
- B.Ed ब्रिज कोर्स से जुड़ी मांगों का समाधान
- पदोन्नति में TET की अनिवार्यता समाप्त करने
- 13 फरवरी 2026 के भर्ती एवं पदोन्नति नियम में संशोधन या निरस्तीकरण की मांग शामिल है।
13 फरवरी के नियम को लेकर भी नाराजगी
शिक्षक संगठनों ने 13 फरवरी 2026 को जारी भर्ती एवं पदोन्नति नियम को लेकर भी आपत्ति जताई है। मोर्चे का कहना है कि नियमों में ऐसा प्रावधान नहीं होना चाहिए जिससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के प्रमोशन के अवसर प्रभावित हों। संगठनों ने नियम में आवश्यक संशोधन करने अथवा उसे निरस्त कर शिक्षकों के हितों के अनुरूप नई व्यवस्था बनाने की मांग की है।
अब 18 अगस्त पर टिकी नजर
शिक्षकों के अलग-अलग संगठनों के एक मंच पर आने के बाद सरकार के सामने अब उनकी मांगों पर निर्णय लेने की चुनौती है। 18 अगस्त को सौंपे जाने वाले ज्ञापन के बाद सरकार का रुख क्या रहता है, यह देखना अहम होगा। फिलहाल, शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने साफ संकेत दिया है कि TET की अनिवार्यता हटाने और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति को लेकर वह अपनी मांग मजबूती से सरकार के सामने रखेगा।
