16.85 लाख की वसूली पर लगा ब्रेक, भिलाई निगम के 7 अभियंताओं को मिली राहत, हाई कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब
बिलासपुर : भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यो में कथित अनियमितता के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सात अभियंताओं के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अधिक भुगतान की वसूली पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक लगाते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और नगर निगम भिलाई के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जस्टिस बी डी गुरु की सिंगल बेंच ने यह आदेश उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने, कृष्ण कुमार जंघेल और सहायक अभियंता श्वेता वर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखा।
29 अनुबंधों की जांच, 21 में कम निर्माण का दावा
नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य कराए गए थे। इन निर्माण कार्यो में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद दुर्ग कलेक्टर ने पी डब्ल्यू डी और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के कार्यपालन अभियंताओं से संयुक्त जांच कराई। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, कुल 29 अनुबंधों में से 21 में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा की तुलना में मौके पर कम निर्माण पाया गया। रिपोर्ट में 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया। इसके बाद कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और कथित अतिरिक्त भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देशों के पालन में मुख्य अभियंता ने सात अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए अभियंताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बचाव का नहीं दिया मौका, कर दी कार्रवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जांच प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि कलेक्टर के पत्र में ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और वसूली के निर्देश दे दिए गए थे। अधिवक्ता के अनुसार, इस परिस्थिति में कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगना महज औपचारिकता बनकर रह जाता है। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश, अधिकारियों से मांगा जवाब
दलीलों पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लिखित अनुशासनात्मक कार्रवाई और वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। साथ ही मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया।
