नर्सिंग कॉलेज को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मान्यता रद्द करने के आदेश पर रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कॉलेज ऑफ नर्सिंग मेडुका को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए संस्थान की मान्यता और संबद्धता रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच ने छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा संचालक (डीएमई) के 25 सितंबर 2026 के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। अदालत में सुनवाई के दौरान मान्यता रद्द करने के अधिकार और संबंधित कानूनी प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गई।
मान्यता रद्द करने के अधिकार पर विवाद
कॉलेज प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता कार्तिक कथूरिया ने अदालत में दलील दी कि छत्तीसगढ़ उपचारिका, प्रसविका, सहायक उपचारिका-प्रसविका तथा स्वास्थ्य निरीक्षक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1972 की धारा 24 के तहत मान्यता देने या वापस लेने का अधिकार संबंधित पंजीयन प्राधिकारी के पास है। उनके अनुसार, राज्य सरकार के अधिकारी संस्थान का निरीक्षण कर सकते हैं और कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं, लेकिन सीधे मान्यता रद्द करने का आदेश जारी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य शासन की ओर से उप-महाधिवक्ता आनंद डहरिया ने दलील दी कि संस्थान की मान्यता जारी रखने के विषय में निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। वहीं, इंडियन नर्सिंग काउंसिल की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि विवाद मुख्य रूप से कॉलेज प्रबंधन और राज्य सरकार के बीच का है और परिषद को इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया था।
दिसंबर में होगी अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित अधिनियम की धारा 24 पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार को 4 सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जवाब पेश होने के बाद कॉलेज प्रबंधन को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से कॉलेज प्रबंधन को राहत मिली है।
