जमीन मिली, भवन नहीं बना, CAT की स्थायी बेंच पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य से मांगा जवाब
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को सक्षम अधिकारी से विस्तृत जानकारी लेकर तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वहीं, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता को भी इस संबंध में शासन से निर्देश लेने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
दो महीने में सिर्फ एक सप्ताह काम, पक्षकारों की बढ़ रही परेशानी
बिलासपुर के छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम ने जनहित याचिका दायर कर राज्य में कैट की स्थायी बेंच स्थापित करने की मांग उठाई है। याचिका में बताया गया कि वर्तमान में कैट की मुख्य पीठ जबलपुर में है, जबकि बिलासपुर में इसकी सर्किट बेंच सीमित अवधि के लिए संचालित होती है। यह बेंच हर दो महीने में एक सप्ताह काम करती है और साल में केवल पांच बार बैठती है। इस व्यवस्था के कारण केंद्रीय अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य पक्षकारों को आवेदन जमा करने, दस्तावेजों की खामियां दूर करने तथा दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए जबलपुर जाना पड़ता है। इसके बाद प्रकरण सुनवाई के लिए तैयार होने पर ऑनलाइन सुनवाई की जाती है। इससे समय, धन और श्रम की बर्बादी के साथ पक्षकारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बोदरी में जमीन आवंटित, फिर भी छोटे कमरे में चल रही बेंच
याचिका में कैट की मौजूदा व्यवस्था के बारे में बताया गया कि बिलासपुर में अधिकरण भवन के निर्माण के लिए हाई कोर्ट भवन के पास बोदरी में जमीन आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम के प्रथम तल पर स्थित एक छोटे कमरे में संचालित हो रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध है, तो स्थायी बेंच की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इससे छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षकारों को अपने मामलों के लिए बार-बार जबलपुर जाने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।
रेलवे, आईएएस, आईपीएस तक के मामलों की होती है सुनवाई
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में केंद्र सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई होती है। इनमें रेलवे, डाक विभाग, बीएसएनएल, केंद्रीय विद्यालयों तथा अन्य केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा संबंधित सेवा मामलों में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के प्रकरण भी अधिकरण के समक्ष आते हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में स्थायी बेंच नहीं होने से बड़ी संख्या में संबंधित पक्षकारों को न्यायिक प्रक्रिया के लिए दूसरे राज्य पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थायी बेंच की स्थापना से स्थानीय स्तर पर सुनवाई और प्रकरणों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के अंदर जवाब देने के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी जुटाने और सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं, राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता को छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच स्थापित करने, विशेषकर बिलासपुर में इसकी स्थापना की संभावनाओं पर शासन से निर्देश लेने को कहा गया।
