बिलासपुर आबकारी विभाग का बड़ा खेल सिस्टम के नाम पर बीयर बार वालों से 60 लाख की अवैध वसूली

बिलासपुर आबकारी विभाग का बड़ा खेल सिस्टम के नाम पर बीयर बार वालों से 60 लाख की अवैध वसूली

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आबकारी विभाग के अफसरों ने भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड बना दिया है। गांव और कस्बों में अवैध शराब बेचने वालों को पकड़ने में ये एक्साइज अफसर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। लेकिन शहर के बीयर बार संचालकों से मोटी वसूली करने में इन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बिलासपुर के करीब 22 बीयर बार संचालकों से सिस्टम के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये की बड़ी रकम वसूल ली गई है। यह भारी रकम लाइसेंस नवीनीकरण की सरकारी फीस से बिल्कुल अलग है। अफसर इसे ऊपर तक जाने वाला जरूरी कट बताकर खुलेआम लूट मचा रहे हैं और कारोबारी दहशत में हैं।

हर बीयर बार से ढाई लाख रुपये की सीधी लूट

बिलासपुर जिले में इस समय 20 से 22 बीयर बार संचालित हो रहे हैं। आबकारी विभाग के अफसरों ने इन सभी बार संचालकों को लाइसेंस रिन्यूअल के समय जमकर डराया। नियम के मुताबिक नवीनीकरण की सरकारी फीस तो सीधे खजाने में जमा हो गई। लेकिन अफसरों ने अपना अलग प्राइवेट टैक्स लगा दिया। हर बीयर बार संचालक से 2 लाख से लेकर 2 लाख 50 हजार रुपये तक की भारी भरकम मांग की गई। धंधा बंद होने के डर से बार संचालकों को मजबूरन यह रकम देनी पड़ी। अफसरों ने बड़ी बेशर्मी से कहा कि यह पैसा सिस्टम को चलाने के लिए बहुत जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आबकारी विभाग का यह सिस्टम आखिर है क्या और इस काली कमाई का पैसा किन किन बड़े नेताओं और अफसरों की जेब में जा रहा है।

अवैध शराब पर कार्रवाई जीरो वसूली में बने हीरो

आबकारी विभाग का असली काम गली मोहल्लों में बिक रही अवैध शराब को रोकना है। बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों में शराब माफिया और कोचिए धड़ल्ले से अपना काम कर रहे हैं। गांवों में अवैध शराब की तस्करी लगातार जारी है। वहां इन एक्साइज अफसरों की कोई टीम नजर नहीं आती। छापामार कार्रवाई के नाम पर वहां सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है। लेकिन जब बात शहर के पॉश बीयर बार की आती है तो ये अफसर पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं। क्योंकि वहां से बिना किसी मेहनत के लाखों रुपये की काली कमाई बड़े आराम से मिल जाती है। जो अफसर छोटे शराब तस्करों से डरते हैं वह बार मालिकों को नियम कानून का डर दिखाकर पैसा ऐंठ रहे हैं।

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रायपुर और दुर्ग में पैसा वापस कर चुके हैं अफसर

सिस्टम के नाम पर यह खुली लूट सिर्फ बिलासपुर जिले की कहानी नहीं है। आबकारी विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो कमोबेश पूरे छत्तीसगढ़ में यही हाल चल रहा है। इससे पहले राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले में भी इन्हीं अफसरों ने ऐसा ही गोरखधंधा चलाया था। वहां भी बार संचालकों से लाखों रुपये की वसूली की गई थी। लेकिन वहां इनका दांव उल्टा पड़ गया था। जब यह बात रायपुर और दुर्ग के कलेक्टर और आबकारी कमिश्नर तक पहुंची तो विभाग में हड़कंप मच गया। ऊपर से भारी दबाव पड़ने पर इन भ्रष्ट एक्साइज अफसरों को वसूली की सारी रकम बार संचालकों को चुपचाप वापस लौटानी पड़ी थी। रायपुर में फेल होने के बाद अब वही वसूली मॉडल बिलासपुर में लागू कर दिया गया है।

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कलेक्टर और प्रभारी मंत्री के पास पहुंची शिकायत की फाइल

बिलासपुर के आबकारी अफसरों की इस भारी मनमानी की खबर अब छिप नहीं पाई है। डरे हुए बार संचालक अब अपने बचाव के लिए एकजुट हो रहे हैं। इस पूरी अवैध वसूली की पुख्ता शिकायत बिलासपुर कलेक्टर से करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। चर्चा है कि जिले के प्रभारी मंत्री के संज्ञान में भी यह पूरी बात ला दी गई है। पूरे छत्तीसगढ़ के कारोबारी जगत में इस वसूली कांड की चर्चा काफी तेज हो गई है। व्यवसायियों में भारी गुस्सा है। जब इस गंभीर मामले में आबकारी विभाग के बड़े अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो सभी ने चुप्पी साध ली। कोई भी जिम्मेदार अफसर फोन उठाने को तैयार नहीं है।

क्या छत्तीसगढ़ में फूटने वाला है एक और नया शराब घोटाला

सरकारी नियम के तहत शराब या बीयर बार के लाइसेंस रिन्यूअल की फीस सीधे सरकारी खजाने में ऑनलाइन जमा होती है। उसका पूरा हिसाब किताब और रिकॉर्ड एकदम पारदर्शी होता है। लेकिन सिस्टम के नाम पर जो 50 से 60 लाख रुपये नगद बटोरे गए हैं वह किस खजाने में जा रहे हैं यह आज का सबसे बड़ा सवाल है। छत्तीसगढ़ में शराब घोटालों का पुराना इतिहास रहा है। पिछली सरकार में भी आबकारी विभाग में करोड़ों के बड़े घोटाले सामने आए थे जिसकी जांच आज भी चल रही है। अब बिलासपुर में सिस्टम के नाम पर हो रही इस नई लूट ने एक बार फिर नए आबकारी घोटाले की आहट दे दी है। 

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