भारतमाला प्रोजेक्ट: पहली बारिश भी नहीं झेल पाई सड़क, जगह-जगह दरारें और पैबंद
रायपुर। रायपुर से विशाखापट्टनम तक बन रहे भारतमाला इकोनॉमिक कॉरिडोर के छत्तीसगढ़ वाले हिस्से में बारिश के बाद सड़क की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। करीब 125 किमी के तैयार और निर्माणाधीन हिस्से में कई जगह सड़क पर दरारें और मरम्मत के निशान मिले हैं। कांकेर जिले में दुधावा से धनोरा के बीच स्थिति ज्यादा खराब नजर आई।
दुधावा के पास पुल की ढलान को थामने के लिए बनाई गई मिट्टी बारिश के बाद कई जगह खिसक गई। सड़क को ऊंचाई देने के लिए बनाया गया एप्रोच एम्बैंकमेंट भी पानी के साथ बहता दिखाई दिया। इसके चलते दुधावा के पास रास्ता बंद कर दिया गया है। वाहन अब गांव की संकरी सड़क से होकर निकल रहे हैं।
नई सड़क पर मरम्मत के निशान
कुरूद से करीब आठ किमी पहले लगभग एक किलोमीटर के हिस्से में 10 से ज्यादा जगह पैचवर्क दिखाई दिया। सड़क के दोनों तरफ मरम्मत के निशान हैं। आगे टनल की ओर जाने पर भी कई स्थानों पर दरारें और पैचवर्क नजर आए। सड़क नई है, लेकिन मरम्मत के निशान देखकर ऐसा लगता है कि बारिश ने सड़क की पहली परीक्षा जल्दी ही ले ली।
टनल के आगे अभी काम बाकी
कांकेर-कोंडागांव के बीच पहाड़ी इलाके में टनल तक सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके आगे ओडिशा सीमा तक करीब 20 किमी हिस्सा अभी अधूरा है। एक टनल के मुहाने पर सफाई चल रही है, जबकि दूसरा बंद है। इस हिस्से में कई पुल बनाए गए हैं, लेकिन सभी जगह सड़क का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। कहीं मुरम डाली जा रही है तो कहीं गिट्टी बिछाकर जमीन तैयार की जा रही है।
तीन पैकेज में बन रहा कॉरिडोर
छत्तीसगढ़ में इस कॉरिडोर की लंबाई 124.661 किमी है। निर्माण को तीन पैकेज में बांटा गया है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इनकी कुल लागत 4,146.08 करोड़ रुपए है। इसमें झांकी-सर्गी, सर्गी-बासनवाही और बासनवाही-मरंगपुरी के हिस्से शामिल हैं।
विशेषज्ञ ने बताया सड़क बनाने का तरीका
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के डॉयरेक्टर डॉ. पीएसएल राय के मुताबिक सड़क निर्माण में स्थानीय मिट्टी के हिसाब से सामग्री का चयन जरूरी होता है। अलग-अलग लेयर में सामग्री डालकर उसे अच्छी तरह दबाने के बाद ही अगला काम किया जाता है। सड़क में दरार या उखड़ने की स्थिति मिलने पर सामग्री और निर्माण की प्रक्रिया की जांच की जरूरत होती है।
एनएचएआई ने कहा-स्लोप ठीक कर दिया
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर शमशेर सिंह के मुताबिक बारिश के कारण स्लोप में ऐसी स्थिति बन सकती है। दुधावा में स्लोप की मरम्मत कर दी गई है। उनका कहना है कि स्लोप और सड़क के बीच चार से पांच मीटर का अंतर है, इसलिए सड़क को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि अभी काम चल रहा है और निर्माण पूरा होने के बाद ऐसी परेशानी नहीं रहेगी।
