पीब्ल्यूडी की अनदेखी का नतीजा: उपनिदेशक अभियोजन के कक्ष की सीलिंग गिरी, बाल-बाल बचे अधिकारी-कर्मचारी
जांजगीर-चाम्पा। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर जांजगीर में स्थित उपसंचालक अभियोजन कार्यालय में 22 जुलाई को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कार्यालय में पदस्थ उपनिदेशक श्री श्यामलाल पटेल के कक्ष की सीलिंग अचानक भरभरा कर गिर पड़ी। गनीमत रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय कक्ष में उपस्थित अधिकारी और कर्मचारी बाल-बाल बच गए। अगर सीलिंग का मलबा किसी के ऊपर गिरता, तो जनहानि हो सकती थी। यह हादसा लोक निर्माण विभाग (पीब्ल्यूडी) की घोर लापरवाही का नतीजा है।

हैरानी की बात यह है कि भवन की इस जर्जर अवस्था को लेकर विभाग अनजान नहीं था। अभियोजन कार्यालय द्वारा पीब्ल्यूडी को इस संबंध में पूर्व में 11 बार लिखित स्मरण-पत्र भेजे जा चुके थे। इसके अलावा अनेक बार मौखिक रूप से भी अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल सुधार की मांग की गई थी। वर्ष 2018 में पीब्ल्यूडी द्वारा बनाए गए इस भवन की हालत इतने कम समय में ही इतनी खराब हो गई है कि इसके निर्माण मानकों पर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण के समय से लेकर आज तक इस भवन में रंग-रोगन तक का काम नहीं हुआ है। मरम्मत के लिए जुलाई 2021 से लेकर जनवरी 2025 तक लगातार पत्राचार किया गया। इन पत्रों की प्रतिलिपि कलेक्टर और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी भेजी गई, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन साधे बैठा रहा।
भवन की बदहाली केवल सीलिंग गिरने तक ही सीमित नहीं है। अधिकारी कक्ष के अंदर बना अलमीरा दरार पड़ने के कारण टूटने की कगार पर है, जिससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। नवनिर्मित भवन की खिड़कियों के पल्ले और सनमाईका पूरी तरह सड़ चुके हैं और ज्यादातर खिड़कियों की सिटकनी नहीं लग पाती। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है और कई जगह सीपेज होता है, जिसके कारण यहां रखे महत्वपूर्ण अदालती और विभागीय दस्तावेजों के खराब होने का अंदेशा बना रहता है। इसके साथ ही, दीवारों में दरारें आ गई हैं, फर्श के टाइल्स उखड़ चुके हैं और प्रसाधन कक्ष में पानी तक नहीं आता क्योंकि अधिकांश नल खराब हो चुके हैं।
कार्यालय की ओर से पीब्ल्यूडी को कई अन्य जरूरी काम प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया था। इनमें खिड़कियों में स्लाइडर लगाना, वेंटीलेटर में पानी से बचाव के लिए छज्जा या शीट लगाना, मुख्य ग्रिल गेट की वेल्डिंग, और खाली पड़े हिस्से को जालीदार तार या बाउंड्रीवॉल से घेरना शामिल था। साथ ही, बचे हुए बजट से छत के ऊपर अतिरिक्त कक्ष और शेड निर्माण की भी मांग की गई थी। 11 बार लिखित शिकायत और लगातार पत्राचार के बावजूद पीब्ल्यूडी के अधिकारियों ने निरीक्षण कर सुधार कार्य करने की जहमत नहीं उठाई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज यह घटना घटी। सीलिंग गिरने की इस घटना के बाद से कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी दहशत में हैं और जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
