फर्जी रसीद से प्रेस क्लब सदस्य बनने की जुगत में लगे कथित पत्रकारों की हाईकोर्ट में हुई फजीहत... हाईकोर्ट ने मामले को सुनने से किया इनकार... 

फर्जी रसीद से प्रेस क्लब सदस्य बनने की जुगत में लगे कथित पत्रकारों की हाईकोर्ट में हुई फजीहत... हाईकोर्ट ने मामले को सुनने से किया इनकार... 

बिलासपुर। प्रेस क्लब की राजनीति में पिछले दरवाजे से एंट्री करने की कोशिश कर रहे कथित पत्रकारों को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। चुनाव में मतदान की अनुमति मांगने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने सुनने लायक ही नहीं माना। न्यायमूर्ति पीपी साहू की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। 

दरअसल यह पूरा विवाद फर्जी रसीदें काटकर नए सदस्य बनाने से जुड़ा है। पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली और सचिव दिलीप यादव की जोड़ी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से सदस्यता बांटकर क्लब पर कब्जा करने का ताना-बाना बुना था जो अब पूरी तरह बिखर गया है।

प्रेस क्लब के गलियारों में चर्चा है कि खुद को पत्रकार बताने वाले कई लोग जेब में पुरानी रसीदें लेकर इस उम्मीद में घूम रहे थे कि वे चुनाव में वोट डालेंगे। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया कि सदस्यता के नाम पर जनवरी 2025 के नाम पर जो रसीदें आनन फानन बांटी गईं, उसमें गंभीर खामी थी। साल 2021 से 2023 के बीच की पुरानी कार्यकाल की रसीद बुक में रसीद काटी गई। यह बिल्कुल वैसा ही मामला निकला जैसे कोई आज की तारीख में बैठकर चार साल पुरानी तारीख का टिकट कटा ले। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद प्रशासन ने भी जांच बैठाई और इन रसीदधारी सदस्यों की सूची को अमान्य कर दिया है।

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इससे पहले रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं पीएस भोई ने 18 नवंबर को एक आदेश जारी कर पिछली चुनाव प्रक्रिया को दूषित करार दिया था। रजिस्ट्रार ने पाया कि क्लब ने कोई रिकॉर्ड ही जमा नहीं किया और नोटिस का जवाब देने के बजाय मनमानी की गई। रजिस्ट्रार ने निर्वाचित कार्यकारिणी को भंग कर दिया था जिसके बाद कलेक्टर ने सहायक पंजीयक ज्ञान प्रकाश साहू को प्रशासक नियुक्त किया है। ज्ञान प्रकाश साहू ने बताया कि अब क्लब की नियमावली के हिसाब से पारदर्शी चुनाव कराए जा रहे हैं और केवल असली पत्रकारों को ही वोट डालने का हक मिलेगा।

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अंदरखाने से खबर मिल रही है कि फर्जी सदस्यता दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी उगाही भी की गई थी। इस अवैध वसूली को छिपाने के लिए रसूखदारों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया लेकिन सरकारी जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। अब प्रेस क्लब के पत्रकारों में पुरानी कार्यकारिणी को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। नाराज पत्रकारों का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ है और अब इस जालसाजी के खिलाफ जल्द ही थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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