भविष्य संवारने निकले 12 हजार छात्रों की किस्मत भगवान भरोसे बिना ट्रेनर ही दिला रहे छमाही परीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को रोजगार सिखाने का सरकारी सपना अब मजाक बनकर रह गया है। राज्य के 245 स्कूलों में पढ़ने वाले 12 हजार से ज्यादा छात्र बिना किसी शिक्षक के ही छमाही परीक्षा दे रहे हैं। इन स्कूलों में 490 वोकेशनल ट्रेनर की भर्ती होनी थी जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। आलम यह है कि तिमाही परीक्षा भी बच्चों ने बिना पढ़ाई के दी थी और अब छमाही का भी वही हाल है। स्कूलों में केंद्र सरकार के करोड़ों रुपए के औजार और मशीनें धूल फांक रही हैं क्योंकि बच्चों को यह सिखाने वाला कोई नहीं है कि इनका इस्तेमाल कैसे करना है।

भर्ती के नाम पर हुआ था बड़ा खेल

इस साल समग्र शिक्षा विभाग ने 1318 ट्रेनरों को रखने का काम 7 प्राइवेट कंपनियों को सौंपा था। आरोप है कि भर्ती के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए की वसूली की गई। जब मामला बिगड़ा और प्रदर्शन शुरू हुए तो इसकी जांच पुलिस को सौंप दी गई। तब से लेकर आज तक नई भर्ती की प्रक्रिया ठप पड़ी है। विभाग की इस सुस्ती का खामियाजा अब उन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है जो कुछ नया सीखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते थे।

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मंत्री के निर्देश भी बेअसर

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शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने पद संभालते ही इस घोटाले पर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। ताज्जुब की बात यह है कि 4 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक किसी पर मामला दर्ज नहीं हुआ है। हालांकि कार्रवाई के नाम पर विभाग के कुछ स्टाफ को इधर से उधर जरूर कर दिया गया है लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्रेनर अब तक नहीं मिल पाए हैं।

पैसे लौटाकर मामला दबाने की कोशिश

विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों पर पैसे लेने के आरोप लगे थे उन्होंने पकड़े जाने के डर से कई उम्मीदवारों को गुपचुप तरीके से पैसे वापस कर दिए हैं। यही वजह है कि अब विभाग के दफ्तर के बाहर शिकायत करने वालों की भीड़ कम हो गई है। ऐसा लग रहा है मानो पैसे लौटाकर पूरे घोटाले को ही रफा-दफा करने की तैयारी चल रही है।

अंकों के खेल में उलझा बच्चों का भविष्य

  •  स्कूलों की संख्या जहां भर्ती नहीं हुई 245
  •   भर्ती के लिए खाली पड़े कुल पद 490
  •  बिना शिक्षक परीक्षा दे रहे कुल विद्यार्थी 12000
  •   भर्ती का जिम्मा लेने वाली प्राइवेट कंपनियां 07

समग्र शिक्षा के अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी होने के कारण भर्ती रुकी हुई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अफसरों की इस जांच और आपसी खींचतान के बीच उन 12 हजार बच्चों के भविष्य का क्या होगा जो बिना कुछ पढ़े ही परीक्षा की कॉपियां भर रहे हैं।

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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