सरकारी कर्मचारियों के निलंबन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, आखिर क्यों खारिज किया सिंगल बेंच का आदेश?
बिलासपुर : सरकारी कर्मचारियों के निलंबन को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर निलंबन अपने आप समाप्त नहीं माना जा सकता कि 90 दिन के भीतर निलंबन जारी रखने का आदेश जारी नहीं हुआ। यदि कर्मचारी को निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय आरोप पत्र यानी चार्जशीट दी जा चुकी है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा निलंबन को बाद में भी जारी रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(5-ए) के तहत सक्षम अधिकारी के पास निलंबन को जारी रखने, संशोधित करने या समाप्त करने का अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार का इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। किसी कर्मचारी को लंबे समय तक निलंबित रखने के लिए समय-समय पर स्वतंत्र और वास्तविक समीक्षा जरूरी है।
सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी का मामला
यह मामला कोरबा कलेक्टर कार्यालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत रहे शिवम सहाय चौहान से जुड़ा है। उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 509(बी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया था। आपराधिक मामले में 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने के कारण उन्हें 25 मार्च 2022 को जारी आदेश के जरिए 23 मार्च 2022 से निलंबित कर दिया गया था। इसके करीब 28 दिन बाद 20 अप्रैल 2022 को विभाग ने उन्हें विभागीय आरोप पत्र भी जारी कर दिया।
डेढ़ साल बाद आया निलंबन जारी रखने का आदेश
शिवम सहाय चौहान ने अपने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि निलंबन के 90 दिन के भीतर उसे जारी रखने का सक्षम अधिकारी की ओर से कोई आदेश नहीं दिया गया। इसके बावजूद करीब डेढ़ साल बाद 28 अगस्त 2023 को निलंबन जारी रखने का आदेश जारी किया गया। मामले की पहली सुनवाई में सिंगल बेंच ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निलंबन जारी रखने के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश 90 दिन के भीतर जारी होना चाहिए था। इसके साथ ही कर्मचारी को सेवा में वापस लेने का निर्देश दिया गया था।
राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में दी चुनौती
सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, कोरबा कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी ने डिवीजन बेंच में अपील की। सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल प्रसून भादुड़ी ने दलील दी कि सिंगल बेंच ने नियम 9 में दी गई पूरी व्यवस्था पर विचार नहीं किया। सरकार का कहना था कि कर्मचारी को निलंबन की अवधि के शुरुआती 90 दिनों के भीतर ही विभागीय आरोप पत्र दिया जा चुका था। ऐसे में केवल निलंबन जारी रखने का आदेश देर से जारी होने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि मूल निलंबन स्वतः समाप्त हो गया।
90 दिन को लेकर कोई कठोर नियम नहीं
डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि हर स्थिति में 90 दिन पूरे होते ही निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा, ऐसा कोई कठोर सिद्धांत नहीं बनाया जा सकता। खासकर तब, जब संबंधित सेवा नियमों में इस तरह की स्वतः समाप्ति की व्यवस्था नहीं है और कर्मचारी को निर्धारित समय के भीतर विभागीय आरोप पत्र दिया जा चुका है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि किसी कर्मचारी को बिना वजह लंबे समय तक निलंबित रखा जा सकता है। निलंबन जारी रखने का फैसला परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए और सक्षम अधिकारी को समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी होगी।
लंबे निलंबन पर भी कोर्ट की सख्ती
डिवीजन बेंच ने कहा कि निलंबन जारी रखने के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। इनमें आरोपों की गंभीरता, विभागीय जांच या आपराधिक मामले की स्थिति, कर्मचारी द्वारा गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका, संबंधित पद की संवेदनशीलता और कर्मचारी को किसी दूसरे गैर-संवेदनशील पद पर तैनात करने की संभावना शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना या विभागीय जांच लंबित होना ही उसे अनिश्चितकाल तक निलंबित रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
खारिज हुआ सिंगल बेंच का फैसला
डिवीजन बेंच ने पाया कि 28 अगस्त 2023 को निलंबन जारी रखने का आदेश सक्षम प्राधिकारी ने मामले के आरोपों की प्रकृति और गंभीरता सहित अन्य परिस्थितियों पर विचार करने के बाद जारी किया था। इसलिए केवल इस वजह से इस आदेश को अवैध नहीं माना जा सकता कि यह 90 दिन की अवधि के बाद जारी हुआ। इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को खारिज कर दिया और राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली। फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि निर्धारित अवधि में विभागीय आरोप पत्र दिए जाने की स्थिति में केवल 90 दिन के भीतर निलंबन बढ़ाने का अलग आदेश नहीं होने से निलंबन स्वतः समाप्त नहीं माना जाएगा। हालांकि, लंबे समय तक निलंबन बनाए रखने के लिए सक्षम अधिकारी को समय-समय पर इसकी आवश्यकता और औचित्य की समीक्षा करनी होगी।
