75 लाख के बांड ने रोकी रेलवे की नौकरी, डॉक्टर ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
बिलासपुर : भारतीय रेलवे में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए ग्रुप-ए अधिकारी के पद पर चयनित छत्तीसगढ़ की मेडिकल हेल्थ ऑफिसर डॉ. अधिश्री वाजपेयी की नियुक्ति अब 75 लाख रुपये के बांड की शर्त के चलते अटक गई है। राज्य सरकार ने उन्हें रेलवे की नौकरी जॉइन करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को डॉ. वाजपेयी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। मामले में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह की तारीख तय की है।
पीजी पूरी करने के बाद राज्य सेवा में की जॉइनिंग
याचिका के अनुसार, डॉ. अधिश्री वाजपेयी वर्तमान में राज्य सरकार के अधीन मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान राज्य सरकार के साथ एक बांड निष्पादित किया था। पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। इसमें उनका चयन भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर, ग्रुप-ए के पद पर हुआ। उन्हें 30 जनवरी 2024 को नियुक्ति भी मिल गई थी। हालांकि, नियुक्ति के समय वह पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों ने उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए निर्धारित अवधि तक छूट दी थी। पीजी की पढ़ाई पूरी होने और छूट की अवधि समाप्त होने के बाद उन्होंने राज्य सरकार की सेवा जॉइन कर ली।
रेलवे में जॉइनिंग के लिए मांगी एनओसी
याचिका में कहा गया है कि रेलवे की नियुक्ति पर जॉइन करने के लिए डॉ. वाजपेयी ने राज्य सरकार से एनओसी मांगी थी। लेकिन उनका आवेदन 16 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार के साथ किए गए बांड में 75 लाख रुपये की राशि की शर्त है। उन्हें आशंका है कि यदि वह राज्य सरकार से एनओसी लिए बिना रेलवे की नियुक्ति जॉइन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं तो बांड की शर्तों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
एनओसी पर पुनर्विचार की मांग
डॉ. वाजपेयी ने हाईकोर्ट से राज्य सरकार को उनके एनओसी आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही 75 लाख रुपये की बांड राशि की शर्त से छूट देने के उनके अनुरोध पर भी विचार करने की मांग की गई है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में होगी। अब सरकार के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि डॉ. वाजपेयी को रेलवे की ग्रुप-ए सेवा में शामिल होने के लिए एनओसी और बांड के मामले में क्या राहत मिलती है।
