छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: उदय राव को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, EOW/ACB केस में मिली राहत
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले से जुड़े मैनपावर भुगतान मामले में आरोपी N. उदय राव को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। यह मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) की शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने राव को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम राहत दी है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को तय की गई थी।
मैनपावर बिलों में कथित गड़बड़ी का मामला
जांच एजेंसी EOW/ACB के आरोपों के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब दुकानों पर कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े ठेकों में ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर कथित तौर पर बढ़े हुए दावे पेश किए गए। एजेंसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए A-2-Z Infraservices Limited को करीब 34.06 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। जांच में लगभग 6.90 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमीशन राशि का भी आरोप लगाया गया है।
राव ने आरोपों से किया इनकार
N. उदय राव ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनकी ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे A-2-Z Infraservices Limited के निदेशक या शेयरधारक नहीं थे। उनकी तरफ से कथित वित्तीय लेनदेन और उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री पर भी सवाल उठाए गए। राव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
मई में हुई थी गिरफ्तारी
EOW और ACB ने उदय राव को मई 2026 में इस मामले में गिरफ्तार किया था। मामला CSMCL से जुड़े कथित 182.98 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता/ओवरटाइम भुगतान प्रकरण की जांच का हिस्सा है। बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में मामले की सुनवाई करते हुए राव को अंतरिम जमानत देने का निर्देश दिया था। अदालत ने उनकी रिहाई को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तों के अधीन रखा और राज्य से जवाब भी मांगा था। इसके बाद मामले को 1 अक्टूबर की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। फिलहाल, अंतरिम जमानत का यह आदेश मामले में लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण नहीं है। EOW/ACB के आरोप और राव की ओर से पेश की गई दलीलें न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और मामले का अंतिम फैसला अदालत की आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
