Navratri 2026: अखंड ज्योत बुझ जाए या कलश गिर जाए तो क्या करें? जानें धार्मिक मान्यता के अनुसार उपाय
Navratri 2026 Puja Rules: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और आस्था का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भक्त घटस्थापना, अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
पूजा के दौरान कई बार ऐसी स्थिति भी बन जाती है जब अखंड ज्योत अचानक बुझ जाती है, कलश गिर जाता है या अनजाने में व्रत टूट जाता है। ऐसी घटनाओं को लेकर कई लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय शांत मन से पूजा को दोबारा व्यवस्थित करने और देवी से क्षमा प्रार्थना करने की बात कही जाती है।
अखंड ज्योत बुझ जाए तो क्या करें?
नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है। अगर हवा, तेल या घी खत्म होने अथवा किसी अन्य कारण से दीपक बुझ जाए, तो इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले दीपक को साफ करके उसमें पर्याप्त तेल या घी डालें और धार्मिक परंपरा के अनुसार दोबारा ज्योत प्रज्वलित करें। इसके बाद मां दुर्गा का स्मरण करते हुए क्षमा प्रार्थना और आरती कर सकते हैं। अगर दीपक किसी दुर्घटना या असावधानी के कारण बुझा है, तो आगे उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और हवा या ज्वलनशील वस्तुओं से उचित दूरी बनाए रखें।
पूजा का कलश गिर जाए तो क्या करें?
अगर नवरात्रि के दौरान स्थापित कलश गलती से गिर जाए, तो सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार आवश्यकता होने पर नया कलश विधि-विधान से दोबारा स्थापित किया जा सकता है। नए कलश में स्वच्छ जल भरकर, उपलब्ध परंपरा के अनुसार अक्षत, आम के पत्ते और अन्य पूजा सामग्री रखी जा सकती है। पुराने कलश की सामग्री का निपटारा स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार करें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पूजा दोबारा शुरू करें। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में कलश स्थापना की विधि अलग हो सकती है।
गलती से नवरात्रि का व्रत टूट जाए तो?
व्रत के दौरान अनजाने में कुछ खा या पी लेने पर कई लोग इसे लेकर परेशान हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में खुद को दोष देने या घबराने की जरूरत नहीं है।धार्मिक आस्था के अनुसार मां दुर्गा का स्मरण करते हुए अपनी भूल के लिए सच्चे मन से क्षमा प्रार्थना की जा सकती है। इसके बाद अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा जारी रखी जा सकती है। चाहें तो जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना, अन्न या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी धार्मिक परंपरा में पुण्यकारी माना जाता है। हालांकि, गलती की भरपाई के लिए अतिरिक्त उपवास रखना जरूरी है या नहीं, यह अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग हो सकता है।
पूजा में ऐसी स्थिति आने पर इन बातों का रखें ध्यान
- ज्योत बुझने पर: कारण देखें और सुरक्षित तरीके से दीपक को दोबारा जलाएं।
- कलश गिरने पर: पूजा स्थल साफ करें और जरूरत पड़ने पर कलश को विधि के अनुसार दोबारा स्थापित करें।
- व्रत टूटने पर: देवी का स्मरण कर क्षमा प्रार्थना करें और अपनी परंपरा के अनुसार व्रत या पूजा जारी रखें।
- दान-पुण्य: अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद को भोजन या उपयोगी वस्तुओं का दान कर सकते हैं।
- घबराएं नहीं: पूजा का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति है। किसी अनजानी घटना को लेकर भयभीत होने के बजाय शांत मन से पूजा करें।
सबसे जरूरी है श्रद्धा और सावधानी
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ में किसी तरह की छोटी भूल हो जाने को लेकर डरने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक परंपराओं में भावना, श्रद्धा और सच्चे मन से की गई प्रार्थना को विशेष महत्व दिया जाता है। साथ ही अखंड ज्योत जलाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। दीपक को स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें तथा बच्चों और ज्वलनशील सामान से दूर रखें।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और सामान्य पूजा-पद्धतियों पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों में नियम अलग हो सकते हैं। इसे वैज्ञानिक तथ्य या किसी अनिवार्य धार्मिक नियम के रूप में न लें।
