डर से कपड़े-सामान तक छोड़ भागीं 2 नाबालिग, 28 किमी पैदल चलकर पहुंचीं बतौली, पुलिस ने किया रेस्क्यू

डर से कपड़े-सामान तक छोड़ भागीं 2 नाबालिग, 28 किमी पैदल चलकर पहुंचीं बतौली, पुलिस ने किया रेस्क्यू

जशपुर : शाम करीब 7 बजे बतौली पहुंची दो नाबालिग बच्चियों के चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा था। वे थकी हुई थीं, भूखी-प्यासी थीं और लगातार डरी-सहमी नजर आ रही थीं। दोनों ने अपने गांव लौटने के लिए करीब 28 किलोमीटर पैदल सफर किया, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण अपने गांव केरे पहुंचने के बजाय सरगुजा के बतौली पहुंच गईं। बच्चियों की हालत देखकर लोगों को किसी अनहोनी की आशंका हुई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मामला सामने आने के बाद मानव तस्करी और बाल श्रम के संभावित नेटवर्क को लेकर संदेह होना लगा। हालांकि बच्चियां बगीचा में किसके घर पर और किन परिस्थितियों में काम कर रही थीं, उन्हें वहां कौन लेकर गया और आगे क्या योजना थी, इसकी पुलिस व बाल संरक्षण इकाई जांच कर रही है।

4 हजार रुपये महीने का दिया था लालच

जानकारी के अनुसार जशपुर जिले के केरे गांव की रहने वाली दोनों बच्चियां स्कूल छोड़ चुकी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का फायदा उठाकर गांव के ही एक परिचित युवक ने उन्हें बगीचा में एक घर में काम दिलाने की बात कही। बच्चियों के अनुसार उन्हें हर महीने 4 हजार रुपये देने का भरोसा दिलाया गया था। नाबालिग बच्चियों में से एक ने बताया कि उन्हें बगीचा के एक घर में काम करने के लिए लाया गया था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद माहौल उन्हें ठीक नहीं लगा। बच्चियों को डर लगने लगा कि कहीं उन्हें किसी दूसरी जगह न भेज दिया जाए या उनके साथ कुछ गलत न हो जाए।

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डर के साये में कपड़े छोड़कर भागे

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बच्चियों के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 9 बजे उन्होंने बिना किसी को बताए वहां से निकलने का फैसला किया। जल्दबाजी में वे अपना कपड़ा और अन्य सामान तक वहीं छोड़ गई और पैदल ही गांव की तरफ निकल पड़ीं। रास्ते की जानकारी नहीं होने के कारण दोनों रास्ता भटक गई। घंटों पैदल चलने के बाद शाम करीब 7 बजे वे बतौली पहुंचीं। लगातार पैदल चलने और भूखी-प्यासी होने के कारण दोनों की हालत बदहवास हो गई थी।

राहगीर ने देखा तो पुलिस को दी सूचना

बतौली में बालगोविंद यादव की नजर जब दोनों बच्चियों पर पड़ी तो उन्हें उनकी हालत देखकर संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल डायल-112 को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 के स्टाफ राजू तिर्की ने बच्चियों की हालत देखते हुए सबसे पहले उन्हें होटल ले जाकर नाश्ता कराया। इसके बाद उन्हें थाने लाया गया। रात करीब 10 बजे दोनों बच्चियों को अंबिकापुर स्थित बालिका गृह भेज दिया गया।

बालिका गृह में सुरक्षा बढ़ाई, काउंसलिंग शुरू

बालिका गृह पहुंचते ही दोनों बच्चियों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया। बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। बच्चियों की काउंसलिंग के साथ चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उनके डर और मानसिक स्थिति को समझा जा सके।

बगीचा पर फिर लग रहे आरोप

इस घटना ने बगीचा क्षेत्र में नाबालिगों को काम के नाम पर बाहर ले जाने की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप लग रहे हैं। बाल संरक्षण इकाई और पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले 6 से 12 महीनों में बतौली, बगीचा और अंबिकापुर क्षेत्र से 40 से अधिक नाबालिगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। करीब डेढ़ महीने पहले बतौली बस स्टैंड से भी 14 नाबालिग बच्चियों को बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे मामलों में गांवों से बच्चों को काम दिलाने के नाम पर बाहर ले जाने वाले लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आती है।

क्या बगीचा से आगे भेजे जाने वाला था नेटवर्क?

पूरे मामले में दोनों बच्चियों को बगीचा किसके जरिए और किस उद्देश्य से लाया गया था। क्या उन्हें सिर्फ घरेलू काम के लिए रखा गया था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थीं? क्या उन्हें आगे किसी दूसरे शहर भेजने की तैयारी थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। हालांकि सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बच्चियों को महानगरों में भेजे जाने जैसे दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस मामले में अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस की जांच पूरी होने का इंतजार करना जरूरी है।

बाल संरक्षण अधिकारी बोले- जुटाई जा रही पूरी जानकारी

जिला बाल संरक्षण अधिकारी सरगुजा विक्रांत सिंह ने बताया कि दोनों बच्चियों की काउंसलिंग की जा रही है। बच्चियां जशपुर जिले की रहने वाली हैं और उनसे यह जानकारी ली जा रही है कि वे बगीचा में किसके साथ थीं, वहां क्यों गई थीं और वहां से पैदल निकलने की वजह क्या रही। उन्होंने बताया कि बच्चियों के परिजनों को बुलाकर भी जानकारी ली जाएगी। जांच पूरी होने के बाद टीम बच्चियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाएगी। अधिकारी के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है कि बच्चियां बगीचा से किसी दूसरी जगह भेजी जा रही थीं। वे वहां काम कर रही थीं। पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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