Super El Niño 2026: तेजी से ताकतवर हो रहा अल नीनो, 1950 के बाद सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल होने का अनुमान; WMO ने दी चेतावनी
वॉशिंगटन। दुनिया के मौसम विशेषज्ञों की नजर इस समय प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे El Niño पर टिकी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आकलन के मुताबिक मौजूदा अल नीनो आने वाले महीनों में और ताकतवर हो सकता है और 2026 के अंत तक अपने चरम के करीब पहुंचने की संभावना है। WMO ने चेतावनी दी है कि यह घटनाक्रम कम से कम 1950 के बाद के सबसे मजबूत El Niño घटनाक्रमों में से एक बन सकता है। इसके असर से दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में बड़ा बदलाव आने की आशंका है।
फरवरी 2027 तक जारी रहने की करीब 100% संभावना
WMO के अनुसार, El Niño के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है। संगठन के पूर्वानुमान के मुताबिक यह घटना आने वाले महीनों में और मजबूत होकर Very Strong El Niño की स्थिति तक पहुंच सकती है और वर्ष के अंत के आसपास इसकी तीव्रता चरम पर हो सकती है।WMO का कहना है कि इसके प्रभाव 2027 तक जारी रह सकते हैं। खासतौर पर तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ सकता है।
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समुद्र का तापमान बना सबसे बड़ा संकेत
El Niño का केंद्र उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का मध्य और पूर्वी हिस्सा है। यहां समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच रहा है। ताजा WMO रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर के दौरान इस क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह 2015-16 के पिछले प्रमुख रिकॉर्ड से भी काफी ज्यादा होगा। WMO के अनुसार, असामान्य रूप से गर्म समुद्र इस El Niño को और ऊर्जा दे रहा है। संगठन का कहना है कि El Niño पृथ्वी में नई गर्मी पैदा नहीं करता, बल्कि महासागर में पहले से जमा गर्मी को वायुमंडल में छोड़ने में भूमिका निभाता है।
क्यों खतरनाक माना जा रहा है El Niño?
El Niño, El Niño-Southern Oscillation (ENSO) नामक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली का गर्म चरण है। इसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि होती है और इसके साथ वायुमंडलीय परिस्थितियां भी बदलती हैं। इसका प्रभाव केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसका असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है। कहीं सामान्य से ज्यादा बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, तो कहीं सूखे और गर्मी की स्थिति बन सकती है। WMO के अनुसार, मौजूदा El Niño के कारण आने वाले महीनों में अत्यधिक गर्मी, सूखा और भारी बारिश जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
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‘Super El Niño’ नाम वैज्ञानिकों के बीच चर्चा में
मौजूदा घटनाक्रम को कई मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ वैज्ञानिक विश्लेषणों में “Super El Niño” कहा जा रहा है। हालांकि, WMO स्वयं आधिकारिक वर्गीकरण में “Super El Niño” शब्द का इस्तेमाल नहीं करता और इसे “very strong” El Niño के तौर पर वर्णित करता है।यानी “Super El Niño” को एक लोकप्रिय वर्णन के तौर पर समझना बेहतर है, न कि WMO की कोई आधिकारिक श्रेणी।
4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान क्यों चर्चा में?
इस El Niño को लेकर स्वास्थ्य संबंधी एक अलग वैज्ञानिक अनुमान ने भी चिंता बढ़ाई है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के Climate Impact Lab से जुड़े शोधकर्ताओं के विश्लेषण के मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच El Niño से जुड़ी अत्यधिक गर्मी के कारण दुनिया में 4.51 लाख तक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यह एक मॉडल-आधारित अनुमान है, निश्चित मौतों की भविष्यवाणी नहीं। शोधकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी का प्रभाव क्षेत्र और अवधि के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।
भारत समेत कई देशों पर असर की चिंता
El Niño के दौरान दक्षिण एशिया समेत कई क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत के लिए मानसून और तापमान पर संभावित प्रभाव महत्वपूर्ण है, हालांकि किसी एक क्षेत्र में मौसम कैसा रहेगा, यह केवल El Niño से तय नहीं होता। अन्य जलवायु कारक भी भूमिका निभाते हैं। WMO ने साफ किया है कि El Niño के प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं और इसके साथ अन्य जलवायु प्रणालियों की स्थिति को भी देखना जरूरी है।
2027 तक मौसम पर बनी रहेगी नजर
मौजूदा पूर्वानुमानों के मुताबिक El Niño फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश की स्थिति पर लगातार निगरानी की जरूरत होगी। WMO और राष्ट्रीय मौसम एजेंसियां इस घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही हैं। संगठन ने सरकारों और प्रभावित क्षेत्रों को शुरुआती चेतावनी, तैयारी और जोखिम कम करने के उपायों पर जोर देने की सलाह दी है।
