Mesh Sankranti 2026: जनवरी वाली संक्रांति से कितनी अलग है अप्रैल वाली मेष संक्रांति? जानें धार्मिक महत्व और अंतर

Mesh Sankranti 2026: जनवरी वाली संक्रांति से कितनी अलग है अप्रैल वाली मेष संक्रांति? जानें धार्मिक महत्व और अंतर

Makar Vs Mesh Sankranti differences: सभी लोगों के मन में संक्रांति शब्द सुनते ही सबसे पहले 14 जनवरी वाली मकर संक्रांति का ख्याल आता है, लेकिन ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से 14 अप्रैल को होने वाली मेष संक्रांति का महत्व भी कम नहीं है. पंचांग के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे. यह केवल राशि परिवर्तन नहीं है, बल्कि सौर कैलेंडर के अनुसार सौर नव वर्ष का आरंभ है. आइए विस्तार से समझते हैं कि जनवरी और अप्रैल की इन दो प्रमुख संक्रांतियों में क्या अंतर है और इनका धार्मिक महत्व क्या है.

मकर संक्रांति क्या है?
मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी के आसपास मनाई जाती है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, यानी सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण को देवताओं का दिन और शुभ समय माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और तिल-गुड़ का सेवन विशेष फलदायी माना जाता है.

मेष संक्रांति क्या है?
मेष संक्रांति अप्रैल में आती है और इसे सौर नववर्ष की शुरुआत माना जाता है. इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जो उनकी उच्च राशि है. इसका मतलब है कि सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव इस समय सबसे अधिक प्रबल होता है. यही कारण है कि इस दिन से नए कार्यों, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है. भारत के कई हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे बैसाखी, पुथांडु, पोहेला बैसाख आदि.

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मकर संक्रांति और मेष संक्रांति में मुख्य अंतर

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समय और महीना
मकर संक्रांति जनवरी में आती है, जबकि मेष संक्रांति अप्रैल में मनाई जाती है.

सूर्य की स्थिति
मकर संक्रांति में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जबकि मेष संक्रांति में सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं.

धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति को दान, स्नान और पुण्य प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है, जबकि मेष संक्रांति को नए साल की शुरुआत और शुभ कार्यों के आरंभ के लिए विशेष माना जाता है.

खगोलीय और आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जबकि मेष संक्रांति सूर्य के सर्वोच्च प्रभाव और ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है.

सामाजिक और सांस्कृतिक रूप
मकर संक्रांति पूरे भारत में पतंगबाजी, तिल-गुड़ और दान के पर्व के रूप में मनाई जाती है. वहीं मेष संक्रांति कई राज्यों में नववर्ष के रूप में धूमधाम से मनाई जाती है.

दोनों संक्रांतियों का धार्मिक महत्व
दोनों ही संक्रांतियां हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ मानी जाती हैं. मकर संक्रांति आत्मशुद्धि, दान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देती है, वहीं मेष संक्रांति नए जीवन, नई ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है. जहां मकर संक्रांति व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है, वहीं मेष संक्रांति जीवन में नई योजनाओं और कार्यों को शुरू करने की प्रेरणा देती है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. नेशनल जगत विज़न इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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