शराब दुकान के विरोध में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: महिलाओं-बच्चों ने तोड़ा गेट, विधायक विक्रम मंडावी भी उतरे समर्थन में
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रस्तावित सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भोपालपटनम विकासखंड के संगमपल्ली (मद्देड) गांव में महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों ने शराब दुकान के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस की घेराबंदी पार कर प्रस्तावित दुकान के गेट को तोड़ दिया और शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। आंदोलन को उस समय और बल मिला जब कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।
महिलाओं और बच्चों ने संभाला आंदोलन का मोर्चा
सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण प्रस्तावित शराब दुकान के बाहर एकत्र होने लगे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करते हुए दुकान परिसर तक पहुंच गए और गुस्से में गेट तोड़ दिया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, हालांकि किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप- बिना ग्रामसभा की सहमति खोली जा रही दुकान
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में शराब दुकान खोलने का फैसला ग्रामसभा की सहमति के बिना लिया गया है। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की राय को नजरअंदाज कर जबरन शराब दुकान खोली जा रही है, जिससे गांव का सामाजिक वातावरण प्रभावित होगा और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
'स्कूल नहीं, शराब दुकान क्यों?'
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के बजाय शराब की दुकानें खोलने पर जोर क्यों दे रही है। महिलाओं ने कहा कि यदि गांव में शराब दुकान शुरू हुई तो घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और सामाजिक समस्याएं बढ़ेंगी। उनका कहना था कि इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आर्थिक स्थिति और खेती-किसानी पर पड़ेगा।
विधायक विक्रम मंडावी ने दिया समर्थन
प्रदर्शन के बीच कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ धरने में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार को गांवों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, न कि नशे को बढ़ावा देने वाले कदम उठाने चाहिए।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना
विधायक विक्रम मंडावी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "जहां स्कूल, कॉलेज और रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, वहां सरकार शराब की दुकानें खोल रही है। इससे आदिवासी युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर धकेला जा रहा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी नीतियां सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को और अधिक प्रभावित करेंगी।
शराब दुकान का प्रस्ताव वापस लेने की मांग
ग्रामीणों और विधायक ने प्रशासन से मांग की कि संगमपल्ली में प्रस्तावित सरकारी अंग्रेजी शराब दुकान का प्रस्ताव तत्काल निरस्त किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गांव में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और पुलिस बल तैनात है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है और प्रस्तावित शराब दुकान को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।
