महाकाल मंदिर में फिर विवाद: अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने कर्मचारियों पर लगाए अभद्रता के आरोप, VIP व्यवस्था पर उठाए सवाल
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन व्यवस्था और मंदिर कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने मंदिर के कुछ कर्मचारियों पर अपने और उनके साथ आए साधु-संतों, अनुयायियों तथा समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्धारित प्रोटोकॉल होने के बावजूद उन्हें बाबा महाकाल के दर्शन के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। प्रवेश के दौरान मोबाइल चेकिंग को लेकर सुरक्षा कर्मचारियों और उनके साथ आए लोगों के बीच बहस भी हुई।
इस घटना के बाद महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था, VIP प्रोटोकॉल और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रवींद्र पुरी महाराज ने मंदिर प्रशासन से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
नासिक कुंभ के बाद बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे रवींद्र पुरी
जानकारी के अनुसार, नासिक कुंभ मेले में ध्वज फहराने के बाद अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज गुरुवार को उज्जैन पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने समर्थकों और अनुयायियों के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन करने की इच्छा जताई।
बताया गया कि उनके लिए प्रोटोकॉल के तहत चांदी गेट से गर्भगृह में प्रवेश और पूजन की व्यवस्था निर्धारित थी। इसके बावजूद प्रवेश के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। रवींद्र पुरी महाराज के मुताबिक, मंदिर के सुरक्षा कर्मचारियों ने मोबाइल चेकिंग के नाम पर उन्हें और उनके साथ आए लोगों को रोका। काफी देर तक मशक्कत और बहस के बाद उन्हें मंदिर में प्रवेश मिल सका। इसके बाद उन्होंने गर्भगृह में पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन और पूजन किए।
भोपाल से दिल्ली तक शिकायत करने की कही बात
रवींद्र पुरी महाराज ने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ ही नहीं, बल्कि उनके अनुयायियों और समर्थकों के साथ भी बदतमीजी की है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह भोपाल से लेकर दिल्ली तक शिकायत करेंगे।
उन्होंने मंदिर प्रशासन से अभद्र व्यवहार करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारियों का साधु-संतों के प्रति व्यवहार ठीक नहीं रहता। जब भी संत-महात्मा मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तब किसी न किसी बात को लेकर उन्हें परेशान किया जाता है।
रवींद्र पुरी महाराज ने यह भी कहा कि यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने पहले भी मंदिर में इस तरह का व्यवहार देखा है। उनके मुताबिक, कुछ कर्मचारियों को खुली छूट मिली हुई है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं।
सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिर व्यवस्था पर उठाए सवाल
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाबा महाकाल केवल उज्जैन के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं में श्रद्धालुओं और साधु-संतों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगामी सिंहस्थ कुंभ 2028 का जिक्र करते हुए कहा कि इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं और साधु-संतों के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। यदि मंदिर में इसी तरह का व्यवहार जारी रहा तो इससे महाकाल मंदिर की छवि प्रभावित हो सकती है।
दर्शन व्यवस्था को धंधा बनाने का लगाया आरोप
रवींद्र पुरी महाराज ने आरोप लगाया कि मंदिर की दर्शन व्यवस्था को कुछ लोगों ने धंधा बना दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारी का नाम मंदिर प्रशासन को बता दिया गया है और ऐसे लोगों को मंदिर की व्यवस्था में बनाए रखना उचित नहीं है।
फिलहाल इस मामले में मंदिर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और दर्शन व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है।
