बिजली व्यवस्था सुधारने चेयरमैन सुबोध सिंह एक्शन मोड में : तुरंत दिए 10 करोड़, मंगला और कोनी में बनेंगे नए जोन
बिलासपुर।शहर की बदहाल और चरमराई बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विद्युत विभाग के चेयरमैन सुबोध सिंह ने कमान संभाल ली है। शुक्रवार हुई मैराथन समीक्षा बैठक में चेयरमैन ने बिजली गुल होने की लगातार आ रही शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब आंधी-तूफान पूरे प्रदेश में आते हैं, तो बिजली गुल होने की सबसे ज्यादा शिकायतें बिलासपुर से ही क्यों आ रही हैं? पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे खराब बिजली व्यवस्था सिर्फ बिलासपुर की ही क्यों है? उच्चाधिकारी इन सवालों पर बगलें झांकने लगे। इसके बाद चेयरमैन ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं से जवाब मांगा।
समस्याएं सुनीं और तुरंत निकाले समाधान
चेयरमैन सुबोध सिंह का रवैया सकारात्मक और समस्या को सुलझाने वाला रहा। एई और जेई ने उन्हें बताया कि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से संविदा कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गए हैं। हालत यह है कि खंभों पर चढ़ने के लिए भी लाइनमैन उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से जो काम आधे घंटे में होना चाहिए, उसमें 2 से 3 घंटे लग रहे हैं। नेहरू नगर जोन के अधिकारियों ने यह भी बताया कि मंगला क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है, इसलिए मंगला और कोनी में नए जोन की सख्त जरूरत है।
जमीनी दिक्कतों को सुनने के बाद चेयरमैन सुबोध सिंह ने बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने दोनों जगहों (मंगला और कोनी) पर नए जोन बनाने की तत्काल मंजूरी दे दी। साथ ही बिजली अधोसंरचना को दुरुस्त करने के लिए 10 करोड़ रुपए का विशेष बजट भी जारी कर दिया। पेड़ों की छंटाई का काम न रुके, इसके लिए एक और नई स्काई लिफ्ट मशीन खरीदने की स्वीकृति दी गई।
पुरानी कार्यप्रणाली से अलग दिखा अंदाज
गौरतलब है कि पिछले साल जून में तत्कालीन चेयरमैन डॉ. रोहित यादव ने भी लगातार हो रही बिजली कटौती पर 25 जून को कलेक्टर कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में बैठक ली थी। उन्होंने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था जस की तस बनी रही। इसके विपरीत, सुबोध सिंह ने केवल फटकार नहीं लगाई बल्कि जरूरत के अनुसार तुरंत फंड और मशीनरी की व्यवस्था की।
जनता को ब्लैकआउट से मिलेगी राहत
शहर में बीती 5 मई को आए आंधी-तूफान के बाद से बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था अब तक सुधर नहीं पाई है। आलम यह है कि शहर के बीचों-बीच स्थित वीआईपी इलाकों में 27-27 घंटे तक ब्लैकआउट की स्थिति बन रही है। मुंगेली नाका क्षेत्र में बुधवार रात करीब ढाई बजे से गुल हुई बिजली गुरुवार की शाम 4 बजे बमुश्किल बहाल हो सकी। गीतांजलि पार्क फेज-2 में पिछले सात दिनों से लगातार बिजली बंद हो रही है। रात में लो-वोल्टेज और दिन में अघोषित कटौती के कारण लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा। परेशान जनता जब अधिकारियों को फोन लगाती है, तो वे जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालने लगते हैं।
बता दें कि दो दिन पहले हाई कोर्ट ने भी खराब बिजली व्यवस्था पर संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है, जिसकी 7 जुलाई को सुनवाई होनी है। अब चेयरमैन सुबोध सिंह द्वारा 10 करोड़ रुपए तत्काल मंजूर करने से शहर की जनता को इन परेशानियों से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में मुख्य रूप से ईडी एके अम्बस्थ, अधीक्षण यंत्री सुरेश जांगड़े, आरके झा, ईई अनुपम सरकार, बीबी. नेताम, हेमंत चंद्रा, मिलिंद पांडे समेत सभी जोन के एई और जेई उपस्थित थे।
