बिलासपुर हाईकोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, दुर्ग चुनाव मामले में अर्जी खारिज; अब दर्ज होंगे साक्ष्य

बिलासपुर हाईकोर्ट से भूपेश बघेल को झटका, दुर्ग चुनाव मामले में अर्जी खारिज; अब दर्ज होंगे साक्ष्य

रायपुर। दुर्ग लोकसभा चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने भाजपा सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने की मांग की थी। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और साक्ष्य दर्ज करने का रास्ता खुल गया है।

यह पूरा मामला 2024 के दुर्ग लोकसभा चुनाव का है। भाजपा सांसद विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी याचिका को शुरुआत में ही निपटाने के लिए भूपेश बघेल के वकीलों ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 7 नियम 11 के तहत कोर्ट में आवेदन लगाया था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस आवेदन को नामंजूर कर दिया है।

अदालत में क्या हुआ?

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सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। भूपेश बघेल का पक्ष चाहता था कि याचिका को प्रारंभिक आपत्ति के आधार पर ही खारिज कर दिया जाए। उधर, विजय बघेल की तरफ से इसका कड़ा जवाब पेश किया गया।

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बीते 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे अपने साक्ष्य दर्ज कराने बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंचे थे। लेकिन भूपेश बघेल की तरफ से नियम 11 का अड़ंगा लगा दिए जाने के कारण गवाही की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की पूरी बहस सुनने के बाद आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख तय कर दी थी।

क्या है नियम 11 का पेंच

आदेश 7 नियम 11 के तहत बचाव पक्ष अदालत से यह मांग करता है कि यदि किसी याचिका में कानूनी कार्रवाई का कोई ठोस आधार नहीं है, तो उसे बिना लंबे ट्रायल के शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाए। भूपेश बघेल की ओर से इसी का हवाला देकर याचिका खत्म करने की मांग की गई थी। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी जिक्र था। लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला

यह विवाद इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक भी पहुंच चुका है। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की एसएलपी (SLP) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ही हाईकोर्ट में साक्ष्य दर्ज कराने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ था।

हाईकोर्ट से भूपेश बघेल की शुरुआती आपत्ति खारिज होने के बाद, विजय बघेल की चुनाव याचिका अभी कायम है। अब अदालत में साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश का यह अर्थ नहीं है कि विजय बघेल के लगाए गए आरोप सही साबित हो गए हैं। दावों की असलियत पर आगे की गवाही और सबूतों के आधार पर ही अदालत अपना फैसला सुनाएगी। फिलहाल, ट्रायल आगे बढ़ाने को कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है।

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